सुबो-सुबो.......
कब खोलोगे भाई अपनी-अपनी गिरह..?.
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हालांकि ह्दय और मानस इस स्तर पर आकर संवाद करने को नहीं करता लेकिन बात जब समाज के अमन पसंद नागरिकों के खिलाफ गहरी साजिश की हो तो बतौर पत्रकार मेरा दायित्व है कि अपनी बात ठोक कर रखूं। भले ही अपनी ही बिरादरी से मुझे बहिष्कृत होने का खतरा हो।
विभाजन के पहले तक "जिन्नाह" को खुद नहीं पता था कि यह ख्याली पाकिस्तान आकार कहां लेगा? और ना कभी जिन्नाह ने कभी पाकिस्तान का "नक्शा" ही जाहिर किया, क्योंकि जिन्नाह को पता था कि पाकिस्तान का नक्शा सामने रखा तो इस मुल्क की आवाम मिलकर कोने में ठेल देगी। अफसोस, साजिश मुट्ठी भर जिन्न्हाओं की और भुगता इस मुल्क ने।
कुछ ऐसा ही, दिल्ली में बैठे चंद नेताओं की रची साजिश पर "मुफ्तखोरी" कर रहे चंद दलित चिंतक कर रहे हैं। जो कभी साफ नहीं करते, आखिर ब्राह्मणवाद है क्या..? और दलित राजनीति का "नैतिक विधान" क्या होगा....? क्योंकि उन्हें अच्छी तरह से पता है, यदि ऐसा किया तो देश की "वास्तविक गरीब-शोषित जनता" उनकी सियासी दुकानों को पैरों से रौंद देगी।
दिल्ली में बैठे अंबेडकर के नाम पर नफरत की सियासत पर मुफ्तखोरी करने वाले चिंतकों को मेरी सीधी चुनौती है, यदि साहस है तो बताए, कब रिसने देंगे, आरक्षण के लाभों को वास्तविक बहुसंख्यकों तक..? क्या है उनका नैतिक विधान...? और ब्राह्मणवाद पर सीधा विमर्श करने का साहस कब करेंगे..?
और यदि यह साहस है तो मुझे यहीं बताएं, मैं आमंत्रित करता हूं उन्हें वास्तविक जगत पर...मैं दूंगा उन्हें व्यापक मंच। इसी धरती पर....मुझे खुशी होगी..यदि आप "छिप" कर नहीं, "वास्तविक भारत" में उतर कर संवाद करें। सच, बड़ा उपकार करेंगे आप भारत पर।
मुझे पता है, इन दो-चार "मुफ्तखोर दलित चिंतकों" के साथ चंद "जिन्नाहवादी" भी हैं, जिन्होंने "वामपंथ" की खाल ओढ़ रखी है। उनकी "नकाब" भी खींचूंगा, पर पहले इन दुई-चार को सरिया लिया जाए जरा।
शुभ प्रभात
FROM THE WALL OF @Sumant Bhattacharya ..........
.......................................................................................................................
Sumant Bhattacharya sir आपकी ललकार उनके कानों तक तो पहुंचेगी , लेकिन मस्तिस्क तक नहीं / क्योंकि मस्तिस्क का द्वार उन्होंने बंद कर रखा है , उसमें किसी सार्थक शब्द या चेतना के प्रवेश की कोई गुंजाइश नहीं है / कुछ लोगों ने ३-३ पीढ़ियों से चंद आरक्षित सीटों पर कब्ज़ा जमा रखा है , और अपने ही वर्ग के निचले पायदान पर अँटके लोगों को उनके अधिकारों से वंचित कर रखा है / कुछ लोगों ने राजनैतक योद्धाओं (कम्युनल वॉरियर्स ) के चरणचाम्प कर महत्वपूर्ण पदों पर कब्ज़ा जमा कर बौद्धिक होने की उपाधि प्राप्त कर लिया है / और इन्हीं तिकड़मों को माध्यम बना कर , कुछ लोग सरकारी अनुदान को अपनी डिक्की में बंद कर ऐसे elete हो गए हैं कि बहुसंख्यक जनता के संवाद कि भाषा ही भूल गये हैं /
लेकिन ये बौद्धिक व्यभिचारी अपनी पूरी ऊर्जा अपने राजनीतिक लाभ के लिए , समाज में घृणा की खेती कर रहे हैं / जिन्ना ने इस्लाम के नाम पर जो विष बोया उसकी लहलहाती फसल आज पूरे विश्व की मानवता को निगलने को तैयार बैठी है / ये तथाकथित बौद्धिक व्यभिचारी दलित चिंतन के नाम पर जो विष बो रहे हैं, उसके परिणाम भी आपके सामने हैं / उ प्र जैसे प्रदेश में पिछले बीस साल में सपा और बसपा के सत्ता परिवर्तन में कितने दलित और OBC माताओं की कोख बेवजह सूनी हो जाती है , वह किसी से भी छिपा नहीं है / हाँ इन कम्युनिटी वॉरियर्स के जेब और बैंक अकाउंट जरूर उनके बलिदान और जनता के पैसे से भरता चला जा रहा है , वो भी आपके सामने ही है /
क्या इसके पीछे भी "अपरिभाषित ब्राम्हणवाद " ही है ??
कब खोलोगे भाई अपनी-अपनी गिरह..?.
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हालांकि ह्दय और मानस इस स्तर पर आकर संवाद करने को नहीं करता लेकिन बात जब समाज के अमन पसंद नागरिकों के खिलाफ गहरी साजिश की हो तो बतौर पत्रकार मेरा दायित्व है कि अपनी बात ठोक कर रखूं। भले ही अपनी ही बिरादरी से मुझे बहिष्कृत होने का खतरा हो।
विभाजन के पहले तक "जिन्नाह" को खुद नहीं पता था कि यह ख्याली पाकिस्तान आकार कहां लेगा? और ना कभी जिन्नाह ने कभी पाकिस्तान का "नक्शा" ही जाहिर किया, क्योंकि जिन्नाह को पता था कि पाकिस्तान का नक्शा सामने रखा तो इस मुल्क की आवाम मिलकर कोने में ठेल देगी। अफसोस, साजिश मुट्ठी भर जिन्न्हाओं की और भुगता इस मुल्क ने।
कुछ ऐसा ही, दिल्ली में बैठे चंद नेताओं की रची साजिश पर "मुफ्तखोरी" कर रहे चंद दलित चिंतक कर रहे हैं। जो कभी साफ नहीं करते, आखिर ब्राह्मणवाद है क्या..? और दलित राजनीति का "नैतिक विधान" क्या होगा....? क्योंकि उन्हें अच्छी तरह से पता है, यदि ऐसा किया तो देश की "वास्तविक गरीब-शोषित जनता" उनकी सियासी दुकानों को पैरों से रौंद देगी।
दिल्ली में बैठे अंबेडकर के नाम पर नफरत की सियासत पर मुफ्तखोरी करने वाले चिंतकों को मेरी सीधी चुनौती है, यदि साहस है तो बताए, कब रिसने देंगे, आरक्षण के लाभों को वास्तविक बहुसंख्यकों तक..? क्या है उनका नैतिक विधान...? और ब्राह्मणवाद पर सीधा विमर्श करने का साहस कब करेंगे..?
और यदि यह साहस है तो मुझे यहीं बताएं, मैं आमंत्रित करता हूं उन्हें वास्तविक जगत पर...मैं दूंगा उन्हें व्यापक मंच। इसी धरती पर....मुझे खुशी होगी..यदि आप "छिप" कर नहीं, "वास्तविक भारत" में उतर कर संवाद करें। सच, बड़ा उपकार करेंगे आप भारत पर।
मुझे पता है, इन दो-चार "मुफ्तखोर दलित चिंतकों" के साथ चंद "जिन्नाहवादी" भी हैं, जिन्होंने "वामपंथ" की खाल ओढ़ रखी है। उनकी "नकाब" भी खींचूंगा, पर पहले इन दुई-चार को सरिया लिया जाए जरा।
शुभ प्रभात
FROM THE WALL OF @Sumant Bhattacharya ..........
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Sumant Bhattacharya sir आपकी ललकार उनके कानों तक तो पहुंचेगी , लेकिन मस्तिस्क तक नहीं / क्योंकि मस्तिस्क का द्वार उन्होंने बंद कर रखा है , उसमें किसी सार्थक शब्द या चेतना के प्रवेश की कोई गुंजाइश नहीं है / कुछ लोगों ने ३-३ पीढ़ियों से चंद आरक्षित सीटों पर कब्ज़ा जमा रखा है , और अपने ही वर्ग के निचले पायदान पर अँटके लोगों को उनके अधिकारों से वंचित कर रखा है / कुछ लोगों ने राजनैतक योद्धाओं (कम्युनल वॉरियर्स ) के चरणचाम्प कर महत्वपूर्ण पदों पर कब्ज़ा जमा कर बौद्धिक होने की उपाधि प्राप्त कर लिया है / और इन्हीं तिकड़मों को माध्यम बना कर , कुछ लोग सरकारी अनुदान को अपनी डिक्की में बंद कर ऐसे elete हो गए हैं कि बहुसंख्यक जनता के संवाद कि भाषा ही भूल गये हैं /
लेकिन ये बौद्धिक व्यभिचारी अपनी पूरी ऊर्जा अपने राजनीतिक लाभ के लिए , समाज में घृणा की खेती कर रहे हैं / जिन्ना ने इस्लाम के नाम पर जो विष बोया उसकी लहलहाती फसल आज पूरे विश्व की मानवता को निगलने को तैयार बैठी है / ये तथाकथित बौद्धिक व्यभिचारी दलित चिंतन के नाम पर जो विष बो रहे हैं, उसके परिणाम भी आपके सामने हैं / उ प्र जैसे प्रदेश में पिछले बीस साल में सपा और बसपा के सत्ता परिवर्तन में कितने दलित और OBC माताओं की कोख बेवजह सूनी हो जाती है , वह किसी से भी छिपा नहीं है / हाँ इन कम्युनिटी वॉरियर्स के जेब और बैंक अकाउंट जरूर उनके बलिदान और जनता के पैसे से भरता चला जा रहा है , वो भी आपके सामने ही है /
क्या इसके पीछे भी "अपरिभाषित ब्राम्हणवाद " ही है ??
- Rakesh Opticals Salori Sir log brahmin aur chatriya ko gariyate hai kyoki ye fashion hai es desh me kitane brahmin aur chatriya pm ,cm,minister hai aur kitaney Other cast hai khud hi pata chal jaega satta enki reservation enka bas chilla kar ye use bacha kar rakhana chahate hai debate se door bhagate hai maine to apani jindagi me kabhi bhedabhav nahi kiya aur 400 sal se to desh hi gulam tha.See Translation
- Narendra Parihar 1/3 aarakshit neta milkar jis samaaj ko nahi dho paaye or ve jinhone aarthik tarakki payee bhi ve bas apne sankuchit dayre se na bahar nikal sake na samaaj ko marvadiyo sa/ maheshwari / agarwaal / jain / sikkho sa uThaa sake ......... hindu sanskriti ki varan vyavastha ki jakdan me unhi ahsaso ko lekar dam tod rahe hai ......... hindu sanskriti ke isthapit utsavo ka virodh kar va pare hata jab tak khud ke utsav nahi uthayenge inka vikas nahi hoga ........ ye adhunik yug ke sarkari bhikhaari hai or kuchh bhi nahi ........... koum khud ke AHAM va KHUDDARI se uthatee hai va nahi mitegi ....... ye mit jayenge jo 4 thee peedhi me bhi mazak bane hue hai 1947 seSee Translation
- Rakesh Opticals Salori Mai ye janata hoon ki mera beta jatiya bhedbhav nahi karata mandal sahab kya mujhe use bhedbhav sikhana chahiye taki aapka pseudobrahminism jinda rahe pata nahi wo samajh payega ki nahi mandola ji koi method bataye
- Tribhuwan Singh कृपया हिंदी या आंग्ल भाषा में विचार व्यक्त करें, रोमन भाषा सोनिआ मैडम के लिए आरक्षित है /
- Bharti Subedi Rawat Agree sumant and Dr.tribhuwan ji actually I belive no one after aamedkar and Gandhi became a true dalit chintak .....The leaders who are so called faces of these are just pseudo and they themselves convert into brahman as we term it a process of sanskritization in sociology.....They take all the advantages of so called reservations and privileges in the name of dalit and forgates their own community at the same time if this movement was proceed by honest leaders the situation of dalits and minority dalit would be different they want this issue to blackmail politics and enjoy power by making fool of their own community I don't think we need dalit chintak who are they and what is their contribution in society ????nothing they are just pollutant in society and black sheeps of system........
- Tribhuwan Singh आपके अनुसार थोड़ी न वो आएंगे।
वो तो रक्तबीज हैं
महिष को पूजने वाले
महिष। - Shekhar Bharti देखिये दो स्थिति है एक ओर जाति व्यवस्था जिसका फायदा सदियों से कुछ जाति अनवरत लेती आ रही है सामाजिक रूप से अपने को उच्च बताने वाले, आज शिक्षित विद्वान जो sc st से है उसे निम्न जाति कहते है , दूसरी ओर कुछ लोग अपनी ही जाति में लगातार आरक्षण का फायदा ले रहें हैं अब आपको बताना है कि कौनसा ज्यादा हानिकारक है सिर्फ़ बुद्धिजीवी कमेंट करें Tribhuwan Singh पी आर मीणा Brijmohan Mehar Ajeet SinghSee Translation
- Tribhuwan Singh मैं तो जड जीवी हूँ।
जड़ मूल और कंद ही मेरा भोज्य है ।
बुद्धि जीवी लोग Shekhar Meena Bharti ji के प्रश्न का जबाव दें । - Surendra Solanki शेखर जी।
पढ़ने से क्या जातिगत सोच। उंच नीच की समानता पर ला सकती।
आज एक पढ़े लिखे व्यक्ति जिसके माता पिता के प्रेम के वश वह पैदा हुआ।
आज समाज उन्ही मानको से उसे भी तोल रहा। क्या सवर्ण समाज अपनी इस अवस्था से कभी बाहर आ पायेगा की हम जन्म से ही सवर्ण हैं।
तथाकथिक सवर्णों से प्रश्न होना ही चाहिए।See Translation - Surendra Solanki मैं तो जड जीवी हूँ।
जड़ मूल और कंद ही मेरा भोज्य है ।
बुद्धि जीवी लोग Shekhar Meena Bharti ji के प्रश्न का जबाव दें ।
त्रिभुवन जी आप बच नही सकते। सामाजिक भेद भाव जिसके कारण अगड़ा अपने को अगड़ा मानने को तैयार हे भले ही गुण विहीन हो।See Translation - Tribhuwan Singh मैं कहाँ बच रहा हूँ ।
लेकिन जाति और अछूत पर लिखना बाकी है ।
अभी मेरे विचार सिर्फ "शूद्र कौन थे " और डॉ आंबेडकर के विचारों को जानने समझने तक ही सीमित हैं । - Shekhar Bharti एक तरफ बडी संख्या में सनातन लाभाार्थी है तो दूसरी ओर चंद नूतन लाभार्थी Brijmohan MeharSee Translation
- Surendra Solanki आपने कल ही लिखा था शुद्र कभी ब्राह्मण नही हो सकता।
इस पर आपकी राय क्या है।
इसका मतलब आप या तो दिल से जाति व्यवसाथ को समर्थन करते हैं और अगड़ा पिछड़ा की बात डिबेट तक ही सीमित है।
या आप मेरी बात शुद्र एक साधना की अवस्था को बिलकुल नही समझना चाहते।See Translation - Surendra Solanki हम एक बहस तैयार कर रहे हैं।
दलित चिंतको को एक साइड कर दें।
जो लोग जन्म से sc लिस्ट में हैं। पढ़ लिख गए हैं। हिन्दू धर्म में आस्था है। सवर्णों में पूरे तरह घुल मिल गए हैं।
उन्हें क्यों लगता हे कि अगर वे कभी अपने जन्मगत शब्दों का प्रयोग कभी करेंगे तो एक डर कहीं कोई जातिगत बात न सोच ले। या कोई कमेंट न कर दे।
भले ही ये हीन भावना हे। लेकिन सवर्ण अहंकार के खिलाफ उसके पास क्या है।See Translation - Tribhuwan Singh JUST imagine that can A Engineer or technocrate become a person who knows Bramh ?? without tapasya and other things ?? become
- Tribhuwan Singh सवर्ण के मायने क्या है सोलंकी जी ?? आप तो संस्कृत विद हैं /
- Surendra Solanki भैया जन्म से किसी की योग्यता decide नही होती।
आप तो ऐसी बात कर रहे। मौर्य surname हे इसलिए पढ़ाई नही की होगी।
पढ़ने वालो की कमी कहीं नही हे। भले ही पढ़ने वालो की संख्या 2 से 5 प्रतिशत होSee Translation - Surendra Solanki वर्णमाला के अनुसार
सवर्ण = ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शुद्र
सभी में स श ष और ह आता हे जो स वर्ण कहलाता है।
सामजिक मान्यताओ अनुसार
शुद्र को छोड़ के सब सवर्ण हैं।See Translation - Tribhuwan Singh सवर्ण के मायने क्या है सोलंकी जी ?? specicific answer of specific question . What do you mean by Savarna ??
- Surendra Solanki में उन 2 से 5 % जन्म से sc की बात कर रहा हूँ। जिन्होंने पढ़ाई करने में कोई कसर नही छोड़ी।See Translation
- Surendra Solanki सवर्ण के मायने क्या है सोलंकी जी ?? specicific answer of specific question . What do you mean by Savarna ??
आप हिंदी में बात कर सकते हैं। इंग्लिश को स्ट्रेस करने की जरूरत नही।See Translation - Tribhuwan Singh सवर्ण के क्या मायने हैं / आप उसका विस्तार बता रहे हैं / सवर्ण का अर्थ औयर परिभाष्ा क्या है ??
- Surendra Solanki सामजिक परिपेक्ष में सवर्ण। ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य माने जाते हैं।
यही मैंने लिखा है। और सामजिक परिपेक्ष में यही होता हे।
मैंने यही तो लिखा है अपने उत्तर में।See Translation - Arun Kumar Surendra Solanki G आप भाषा शास्त्र के सहायता से समाज शास्त्र को परिभाषित कर रहें है।See Translation
- Tribhuwan Singh "सवर्ण" शब्द का अर्थ और परिभाषा ?? कौन उस वर्ण में आता है ,वो बाद में /

- Arun Kumar Dharmendra Kumar G मंदिरो मे भी आरक्षण है क्या। एक मंदिर आप भी बनाकर बन जाईये पुजारी।See Translation
- Raj Kumar Peeter आदरणीय त्रिभुवन जी
ज्ञान मुनि महाराज(श्री 10000000000.........8 ज्ञान के महाभण्डार)
आप को हम जैसे `अज्ञानियों' का शत् शत् नमन। आप `महाज्ञानी' होने के साथ ज्ञान के स्वघोषित ` गारंटर ' भी है, इसका मुझे ही नहीं बल्कि आप द्वारा घोषित सभी`अज्ञानियों ' को आभास हो चुका है क्योंकि आप महापुरुषों का तुलनात्मक अध्ययन भी कर सकते हैं और संविधान निर्माताओं तक को `कुबुद्धि' की संज्ञा प्रदान कर सकते हैं।यह क्षमता हम साधारण ज्ञान वाले तुच्छ जीवों में कहाँ? आप तो `मनु' से भी आगे निकल गए,
अगर भविष्य में आप जैसे `नस्लभेदी भारतीयों' युक्त भारत को नए संविधान की आवश्यकता पड़ी तो आप जैसे स्वघोषित प्रकाण्ड `विद्वानों' की हास्यास्पद `बौद्धिक जुगाली' भारत को आदिवासी और दलित शोषक राष्ट्र घोषित करवाने में सहायता प्रदान करेगी।See Translation 
- Dharmendra Kumar Arun jee mandir sare shudron ne hi banwaye hain. Lekin jab mandir se vyapar karne ka time aata hai to ye brahman malik ban baithte hain. Shudron ko to shankaracharya ka bhi pad chahiye brahman shankaracharya ka ekadhikar khatam kijiye.See Translation
- Surendra Solanki मंदिरो मे भी आरक्षण है क्या। एक मंदिर आप भी बनाकर बन जाईये पुजारी।
है में जानता हूँ एक व्यक्ति को जो जन्म से sc लिस्ट में और बड़े मंदिर के छात्रावास में अध्यापक हे। होते हैं लोग।
पर गोपनीय तरीके से काम करते रहतेSee Translation - Arun Kumar Raj Kumar Peeter G आप का रिसर्च बहुत अच्छा चल रहा है। आप सही मायने मे रिसर्च स्कालर है।See Translation
- Praphull Jha जब कोई सार्थक बहस करता है तो "स्वघोसित चिंतक" व्यक्तिवादी हो जाते है , शायद उनका आधार खिसकता नज़र आता है...See Translation
- Chandra Hans Hindustani क्षमा चाहूँगा Raj Kumar Peeter g या तो आप मुद्दे से भाग रहे हो या व्यक्तिगत रूप से कुंठित हो
दोनों ही दिशा में आप बहस को आगे न बढ़ाते हुए भटकाव के पक्षधर हो रहे हेSee Translation - Chandra Hans Hindustani मैंने कहा हे व्यक्तिगत
किससे ये ज्ञात तो आपको स्वयं होना चाहिए मित्र
कारन भी हे लेख पर चर्चा न करना
उलट लेखक को गरिया देना
अगर आप बहस में भाग लेकर अपनी बात रखते
और लेखक के विचारो का विरोध या विश्लेषण करते अच्छा लगता
Raj Kumar Peeter gSee Translation 
- Dharmendra Kumar Arun sir kab khali karwa rahe hain shankaracharya ka pad brahmano se ?See Translation
- Chandra Hans Hindustani Agar aap ye sochate he ki sankaracharya ka pad brahmano ka he to aap galat phami me he mitra Dharmendra KumarSee Translation

- Tribhuwan Singh Dharmendra Kumar जी शंकराचार्य का पद खाली करवाना आप जैसों के बस की बात नहीं है ।
उसका अलग संविधान है जिसकी रचना स्वयं आदि शंकर ने किया था ।
मठामनाय महानुशाशन नाम है उसका ।भारत का संविधान वहां तक अभी पहुँच नहीं बना पाया है ।
हरामखोरी की लत लग गयी आप जैसों को ।
हर चीज हराम में चाहिए। 
- Dharmendra Kumar Haramkhor to savarn jatiyan hain bina koi kam kiye kha rahi hain. Aapka sankarachrya kon sa utpadak kam karta hai Tribhuwan jee haramkhor to wahi hai. Savarn jatiyon ne kon sa utpadak ya srijnatmak karya kiya hai jara ye bhi bataiyegaSee Translation
- Tribhuwan Singh Bla bla bla मत कीजिये ।
तर्क हों तो बोले ।
वरना मूर्खों के लिए मेरी टाइम लाइन पर जगह नहीं है। - Surendra Solanki एक किस्सा सुनाता हूँ।
मेरे मेडिकल कॉलेज में हम लोग फर्स्ट इयर में थे। रैगिंग चल रही थी। क्योकि नाम से सभी लोग एक दुसरे को जानते हैं और आरक्षण और स्वर्ण शब्द वही सीखते सब।...See MoreSee Translation - Chandra Hans Hindustani Dharmendra Kumar sir ji
विष जो बोया गया भारत में सवर्ण और दलित का
आदिकालीन हे या किसी समय
सीमा के अन्तर्गत ऐसा हुआ
विचारणीय हे
अगर जवाब हे तो दीजिये या गेंद Tribhuwan Singh sir के पाले में जाने दीजियेSee Translation 
- Dharmendra Kumar Aapke Tribhuwan sir ek hi war me vayktigat comment karne lage. Brahmano ne ye kaisa dharm banaya jisme usne apne hi ek varg ko shiksha, sampatti aur satta se dur rakha. Aur khud saikron varshon se shiksha, sampatti aur satta par aarakshan lete rahe. Tribhuwan jee aap to janmjat gyani hain aapko to koi murkh kah hi nahi sakta.See Translation
- Shekhar Bharti मैं यहाँ गौर से कमेंट देख रहा हूँ और कुछ लोग सिर्फ़ एक पहलू पर विचार ही कर रहे हैंSee Translation
- Shekhar Bharti देखिये दो स्थिति है एक ओर जाति व्यवस्था जिसका फायदा सदियों से कुछ जाति अनवरत लेती आ रही है सामाजिक रूप से अपने को उच्च बताने वाले, आज शिक्षित विद्वान जो sc st से है उसे निम्न जाति कहते है , दूसरी ओर कुछ लोग अपनी ही जाति में लगातार आरक्षण का फायदा ले रहें हैं अब आपको बताना है कि कौनसा ज्यादा हानिकारक है सिर्फ़ बुद्धिजीवी कमेंट करेंSee Translation
- Tribhuwan Singh Dharmendra Kumar जी मूर्ख आपको मैंने इसलिये कहा क्योंकि आपको मालूम नहीं कि शंकराचार्य होने के लिए जन्मतः ब्रम्हन होना आवश्यक नहीं है ।आज की तारिख में बद्रिकाश्रम मठ के शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती जी जन्मतः ब्रम्हन नहीं है ।
- Chandra Hans Hindustani Dharmendra Kumar ji
Apka javab ayega pahle prashn ka uttar pradan kijiyeSee Translation - Chandra Hans Hindustani वैसे भी साधुओं की जाति कर्मानुसार ब्राह्मण होती हे जन्मतः उनकी पड़ताल सामान्यतः समाज नहीं करता
उनके बीच गुजारे समय के अनुसार कह रहा हूँSee Translation - Arun Kumar Dharmendra Kumar G और उदाहरण चाहिये। क्यों चालाक स्वार्थी दलित चिंतक को सुनकर मूर्ख बन रहे है। इतिहास का सही विश्लेषण करें।See Translation
- Tribhuwan Singh मठामनाय महानुशन में आदि शंकर ने जिन क़ुअलिफिकेशन्स को जरूरी माना है शंकराचार्य बन्ने के लिए , उसमे वर्ण शब्द का जिक्र तक नहीं है ।
Dharmendra Kumar जी कम से कम बौद्धिक वार्तालाप में सही तथ्य से अवगत तो रहें । - Chandra Hans Hindustani Tribhuwan Singh sir ji
किन्तु शोषित जनों के वास्तविक सामाजिक परिवर्तन का आधार क्या होना चाहिए
कैसे समाज में बराबरी का सिद्धान्त सफल होगा कैसे शोषित वर्ग इन स्वार्थी दलित चिंतको से बचे
क्या इनके पास अन्य कोई सम्बल हेSee Translation - Arun Kumar Shekhar Meena Bharti G, आप अपने प्रश्न को विस्तार दे। जाति का आधार क्या है। किस जाति ने किस जाति का नुकसान किया और कैसे। किस जाति ने सामाजिक कार्य किया।किस जाति ने समाज विरुद्ध कार्य किया। काल और परिस्थिति को ध्यान मे रखते हुए तथ्यात्मक प्रश्न करें।उचित विचार विमर्श करने मे सहायक होगा ।See Translation
- Tribhuwan Singh पहले ये स्पष्ट हो जाय कि दलित और शोषित कौन है और कैसे है , पहले ये तो स्पष्ट हो जाय।
- Devendra Bhagwani इतिहास से सीखकर वर्तमान को सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में अग्रसारित करना ही इतिहास का ध्येय होता है ।
औपनिवेशिक शासन के उपरान्त भी भारतीय उपमहाद्वीप में सत्ता का राजनैतिक पथ समाज विभाजन की गिट्टी पर बना है और परत दर परत यह गिट्टी और नुकीली हुई और राजनैतिक सत्ता स्थापित हुई ।
यह मंच हमें विचार व्यक्त करने को एक सीमित स्वतंत्रता देता है किन्तु सकारात्मक परिवर्तन यहाँ से नहीं सृजित हो सकते हैं । यह कार्य तो सामाजिक क्षेत्रों ने संबंध स्थापित करके ही हो सकते हैं ।
हरेक का लेखन एवं उसका पाठक कहीं न कहीं अपने अनुभवों एवं मान्यताओं पर निर्भर होकर ही आकलन करता है । निष्पक्ष आकलन, लेखन तथा सर्वाधिक महत्पूर्ण निष्पक्ष निर्वहन भी दुर्लभ है ।
एक समुदाय का विस्थापन यदि विधि द्वारा स्थापित किसी 'लाभान्वित ' हो सकने वाले वर्ग में हो जाता है तो उसके विचार उस लाभ के समर्थन में विस्थापित हो जाते हैं ।See Translation - Tribhuwan Singh Urea डाल के समाज को भ्रस्ट कर रहें है ।Organic खाद की जरूरत है।
- Surendra Solanki त्रिभुवन जी।
पहले ये स्पष्ट हो जाय कि दलित और शोषित कौन है और कैसे है , पहले ये तो स्पष्ट हो जाय।
पहले जमींदारी व्यवस्था थी। ठाकुर थे। उनके अत्याचार थे।
दलित चिंतक सीधे ब्राह्मण पर कैसे धावा बोलते जबकि अत्याचार में ठाकुरो का हाथ सबसे ज्यादा बताया गया।
दबंग लोंगो से तो आज भी ख़ौफ़ रहता।See Translation 
- Dharmendra Kumar After a particularly long stay of 12 years in Ganagapur, Lord Dattatreya appeared in a dream and instructed Shri Ganesh Bhatt to return to Mangaon and lead the life of a householder, promising to incarnate as his son. It was after his return from Ganag...See More
- Chandra Hans Hindustani समाज में रहते हुए भी समाज में उपेक्षित जन शोषित
अधिकारो से वंचित जन शोषित
नारी शोषित ...See MoreSee Translation 
- Chandra Hans Hindustani त्रिभुवन सर सच्चाई सामने आनी चाहिए Dharmendra Kumar ji ने संदेह उत्पन्न कर दिया सबूत भी दिया। हेSee Translation
- Tribhuwan Singh मैं किसी शंकराचार्य के किसी विवाद के पक्ष विपक्ष में खड़े होने नहीं आया यहाँ ।
मैंने एक तथ्य पेश किया जिस पर Dharmendra Kumar ji ने प्रश्न उठाया था कि ब्राम्हण शंकराचार्य का पद छोड़ें ।
इतिहास बोध पर चर्चा करेंगे कि व्यक्तियों पर ?? - Shekhar Bharti Arun Kumar ji Tribhuwan Singh ji आपने मेरे सवाल का जवाब नही दिया है कृपया दोबारा गौर करेंSee Translation
- Tribhuwan Singh औरं मैं आज की तारिख के शंकराचार्य की बात कर रहन हूँ कि वे जन्म से ब्रम्हं नहीं हैं।
- Shekhar Bharti देखिये दो स्थिति है एक ओर जाति व्यवस्था जिसका फायदा सदियों से कुछ जाति अनवरत लेती आ रही है सामाजिक रूप से अपने को उच्च बताने वाले, आज शिक्षित विद्वान जो sc st से है उसे निम्न जाति कहते है , दूसरी ओर कुछ लोग अपनी ही जाति में लगातार आरक्षण का फायदा ले रहें हैं अब आपको बताना है कि कौनसा ज्यादा हानिकारक हैSee Translation

- Dharmendra Kumar Tribhuwan jee aapke post me aarakshan ki bhi bat hai. Pahle aap to risne den. Saikron varshon se mandirin aur mathon me kundali mare baithe hain.See Translation
- Chandra Hans Hindustani क्या शोषित वर्ग वही नहीं जो मैं समझता हूँ Tribhuwan Singh sir jiSee Translation

- Dharmendra Kumar Tribhuwan jee aapne ambedkar ke nam par nafrat ki siyasat karne ka aarop lagaya hai jati ke nam par saikron varshon se kon si siyasat karte aa rahe hain aap?See Translation
- Tribhuwan Singh @Dharmendra kumar ji आप यदि कोई सार्थक चर्चा करना चाहते है तो स्वागत है ।
वरना कोई और ठिकाना ढूढ़ें।
आपके पूर्वाग्रह आपके साथ। 
- Dharmendra Kumar Tribhuwan jee aapne nam likhkar shankaracharya ka ullekhya kiya hai.

- Dharmendra Kumar Aapne kon se grah ke sath kaha ki ambedkar ke nam par nafrat ki siyasat ki ja rahi hai? Agar aapke pas meri baton ka jawab nahi hai to aap mujhe block karne ke liye swatantra hain.See Translation
- Tribhuwan Singh मैं सार्थक चर्चा करना चाहूंगा इतिहास बोध के साथ ।
नकारात्त्मक और पूर्वाग्रहों का उत्तर मेरे पास नहीं है । 
- Dharmendra Kumar Nam se jyada mahtwpurn ho gaya wartman. Waise Tribhuwan jee bhi koi sabut den to bat ban jayegi.


- Chandra Hans Hindustani Mathura jile me kai varsho se rajnitik dalito ko dekha he maine shosako ke sath man ko milaye hue
Jibh se dalito ko sadhte hue Dharmendra Kumar jiSee Translation - Tribhuwan Singh इसको जानने के लिए अपनी पोस्टों को पढ़ें / और विवेक का इस्तेमाल करें /

- Dharmendra Kumar Aisa kam kewal dalit neta hi nahi kar rahe hain baki log bhi kar rahe hain. Rajniti ke sath samajsewa karna sabke bas ki bat nahi hai. Rajniti ek vyapar hai, labh dekhkar hi karya karte hain neta.See Translation

- Dharmendra Kumar Hum to murkh agyani hain aap janmjat gyani kripya margdarshan karen. ..... are maine kya likh diya aap agar gyan dena chahte to saikron varsh purw hi de dete angrejon ka intjar nahi karte.See Translation

- Dharmendra Kumar Aaj aapka virahspati aapke sath nahi hai Tribhuwan jee. Jyotish mantralaya se sampark kar FB par aaya karen.
- Chandra Hans Hindustani Kya aapko mai janmjaat brahman dikh raha hoo Dharmendra Kumar ji
Pahle pahchaaniye to sahi
Mai karan par ana chahta hoo और कारण इतिहास में छुपा हे
अब आप इतिहास को मिथको से न जौडे कारण भी हे चूंकि इनकी प्रमाणिकता विज्ञानं की कसौटी पर खरी नहीं बताई जाती
तो फिर इतिहास बोध आवस्यक हे
जब भारत आर्थिक रूप से संपन्न था वहाँ पहुंचना पड़ेगा खोज में मार्गदर्शित करे Tribhuwan Singh sirSee Translation - Chandra Hans Hindustani Sumant Bhattacharya sir aapka intjaar kar raha hoo
Tribhuwan Singh Organic का अर्थ उनको स्वतःउपर आने की जीवन शक्ति को प्रोत्साहित करके।
Chandra Hans Hindustani Tribhuwan Singh sir kya kahna chahte he aap samajhiye to sahi Dharmendra Kumar ji












