- Surendra Solanki में ने अध्यात्म का रास्ता चुना ही इसलिए कि में अपने प्रश्न का उत्तर पा सकूँ
में शुद्र कैसे।
कोई बौद्धिक विमर्श इस प्रश्न का उत्तर नही दे सकता। साधना में जब खुद को आतंरिक ज्योति का अनुभव होना शुरू हुआ तब लगा कि यहाँ कुछ अलग हो रहा। ये जन्म कर्म फल का नही साधना का प्रभाव है। जेसे जेसे साधना चलती गयी वेसे वेसे मेरे स्व भाव बदलते चले गए। तब गीता का स्व भाव समझ आ ना शुरू हुआ और पता चला गीता में स्व भाव के जन्म की बात कही गयी है।
आज तो मेने पूरी वर्ण व्यवस्था की परिभाषा ही बदल दी। इससे अतिरिक्त और क्या कर सकता हूँ। चमार शब्द कर्म है और क्षत्रिय ता का अर्थ कर्म करने का साहस है।
शुद्र मन
वैश्य मन बुद्धि
क्षत्रिय मन बुद्धि कर्म
ब्राह्मण मन बुद्धि कर्म चित्त।
यह बिलकुल अलग प्रयोग है। किसी किताब में नही मिलता।
में अपने सबसे बड़े डर का सामना करने में सफल हुआ।
सुरेन्द्र।See Translation - सम्यक् दृष्टि · 11 mutual friendsTribhuwan Singh ji, छिद्रान्वेषण मत करिये, किसी में कमी ढूँढना मुश्किल काम नहीं है| अगर कभी सोचेंगे तो आप को स्वयं अंदाजा हो जायेगा कि पिछले ७०-८० वर्षों में दलितों की स्थिति में जितना सुधार आया है उसमें डा. अम्बेडकर की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है| आप ख्वामखाह उनके पीछे पड़े हैं, आप अपनी मान्यताओं के साथ रहिये हम अपनी| अगर आप सही भी कह रहे हों( बाबा साहब को कम्यूनल अवार्ड दिया गया था , मैंने कहीं पढ़ा नहीं) तो भी कम्यूनल अवार्ड और भारत रत्न की तुलना कहीं से जायज नहीं|See Translation
- Tribhuwan Singh सम्यक् दृष्टि जी इन उद्धरणों को आप इस पोस्ट के किस कंटेंट को challange कर रहें है ।
जरा विस्तार दे ।समझ नहीं आया कुछ। - Surendra Solanki में डॉ आंबेडकर का फोल्लोवेर बन के खुश नही था। डॉ आंबेडकर ने केवल सामाजिक चिंतन किया था। मैंने एक कदम आध्यात्मिक अवस्था में समाज को देखा।
इस लिहाज़ से जो कुछ में कर रहा वह समाज को नई दिशा दे।
सभी को चाहे वो ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य आरक्षित शब्द हो या अनुसूचित जाति के शब्द। सभी को वर्ण व्यवस्था के आध्यामिक आयाम चेतना के स्तर को पता चलना चाहिए।See Translation - प्रदीप सिंह These people are damaged goods. Toxic and poisonous.
- सम्यक् दृष्टि · 11 mutual friendsकंटेट को चैलेंज नहीं कर रहा हूँ | आपने प्रो. विवेक कुमार को रक्त बीज कहा है और कहा कि नफरत की फसल बो रहे हैं ,बाबा की कृपा से खा भी रहे हैं और गरिया भी रहे हैं , मैं आपको बता रहा हूँ आप को नफरत के बीज, जाति वाद के जहर का मूल उत्स तलाशना है तो दलित चिं...See More
- Tribhuwan Singh अभी उसको भी लिखुगा सम्यक् दृष्टि जी।
जाति पर भी लिखूंगा ।आगे आगे। - Tribhuwan Singh और क्या गलत बोल रहा हूँ प्रोफ विवेक कुमार के बारे में ??
क्या वाकई यही नहीं कर रहे है ये ?? - सम्यक् दृष्टि · 11 mutual friendsमैं उनसे मिल चुका हूँ, बहुत बेहतरीन इंसान हैं | वो केवल आइना दिखाते हैं ,किसी को रक्तबीज नजर आए तो इसमें उनकी क्या गलती है?
- प्रदीप सिंह You will see what you want to see. Gutter inspectors can only see filth. They are not going to be affected by the fragrance of the flowers just outside the gutter. It is as simple as that. They have made up their minds that ALL Indian and particularly Hindu is trash. That is the beginning and the end of the matter -as simple as that.
- Surendra Solanki काँग्रेस ने किसी पुरूस्कार का कोई इज्जत नही छोड़ा है
नीलू जी।
राजनीती मानसिक स्तर पर चलती है। वह हमेशा अपनी चाल सोच विचार कर करनी पड़ती।
भारत रत्न भी उनमे से एक।See Translation - सम्यक् दृष्टि · 11 mutual friendsनफरत के बदले प्रेम मिलने की उम्मीद बहुत कम करनी चाहिए| वो जिस वर्ग से संबंधित हैं उसके साथ आज भी कैसी मानवीयता दिखाई जाती है अखबारों में रोज ही पढ़ने को मिल जाती है| आप क्या चाहते हैं कोई प्रतिक्रिया भी व्यक्त न करे , आँख बंद कर बस अच्छा है, अच्छा है बोलता रहेSee Translation
- Tribhuwan Singh सम्यक् दृष्टि जी वो सकता है व्यक्तिगत तौर पे बहुत अच्छे इंसान हो।
उससे मुझे कुछ लेना देना नहीं।
वो समाज को दे क्या रहे है इससे मुझे लेना देना है।
मनमोहन सिंह भी बड़े अच्छे इंसान थे।
हर कोई जानता है ।
तो क्या उनके कार्यकाल के लूट को आप माफ़ कर देंगे ?? - Tribhuwan Singh समाज में जो हो रहा है वो किसी वाद के कारण हो रहा है कि सामाजिक हैसियत में भिन्नता के कारण हो रहा है ?
मायावती सरकार आती है तो हज़ारो बेगुनाह यादव मारे जाते है।
और मुलायम की आती है तो एक हज़ार हरिजन।
ये किस वाद में आता है सम्यक् दृष्टि जी ?? - प्रदीप सिंह यह प्रगतिशील जनवादी सेकुलरवाद में आता है । बहन मायावती की ख़रबों की सम्पत्ति भी उनकी क्रांतिकारी दलित चेतना से उपजी है ।See Translation
- सम्यक् दृष्टि · 11 mutual friendsTribhuwan Singh ji मैं, मायावती या मुलायम सिंह की वकालत नहीं कर रहा हूँ और न ही उनके हर काम को जायज ठहरा रहा हूँSee Translation
- सम्यक् दृष्टि · 11 mutual friendsप्रदीप सिंह , गटर इंस्पेक्टर जो कुछ करता है वह शहर को साफ रखने के लिए करता है, वह भले गंदगी ढूँढता है पर लक्ष्य आप को तथा आप के शहर को स्वच्छ रखना होता है, उसके अच्छे उद्देश्य का मजाक उड़ा रहे हैं! मोदी जी के स्वच्छ भारत अभियान से जुड़कर भी आप उनकी भावना नहीं समझ पाये?See Translation
- Surendra Solanki सम्यक जी।
सबसे बड़ी समस्या मानसिकता और आध्यात्मिकता की है।
आध्यात्मिकता बड़ी आसानी ने मानसिकता को इस्तेमाल करती और शब्दों में मानसिक प्राणी फंस जाता।
ब्राह्मण यहीं से खेल खेलता। जब तक आध्यात्मिक स्तर पर नही जाओगे तब तक एक ब्राह्मण कहाँ से खेल खेल रहा समझ नही आएगा।
हाँ। जब आध्यात्मिक स्तर पर उससे बात करोगे तो बाकई समझ आएगा। इनके पास शब्दों के खेल के अलावा अनुभव कम ही है। जिनके पास अनुभव है उन्हें नमन करना है। पर जिसके पास नही वो फिर आपकी बात नही समझ सकता।See Translation - माधबेंद्र कुमार कम्यूनल अवार्ड खत्म करने के लिए ही गांधी को अंबेडकर के साथ पूना पैक्ट करना पड़ा और संभवत: तब पहली बार आरक्षण आरक्षण अपने अस्तित्व में आया था। पृथक निर्वाचन क्षेत्र के बदले कांग्रेस ने आधी से ज्यादा सीटें दलितों के लिए आरक्षित कर दिया था। संभवत: यह बारगेनिंग थी।See Translation
- Surendra Solanki सम्यक् दृष्टि जी।
प्रदीप जी को में बहुत दिनों से फॉलो कर रहा हूँ।
Gutter के बाहर भी बहुत कुछ है
इनका मतलब guttar का actual guttar से हे ही नहीँ। वे मानसिकता की बात कर रहे।
और आप actual gutter में उलझ गए।
ये पेंच कौन सीखेगा। क्योकि ये सिखाया नही जाता सीखना पड़ता है।See Translation - सम्यक् दृष्टि · 11 mutual friendsसुरेन्द्र जी मैं दोनों गटर की ही बात कर रहा हूँ, अगर वो बाहरी गटर समझना चाहें तो बाहरी, मानसिक समझना चाहें तो मानसिक , बात दोनों पर समान रूप से लागू होती है smile emoticonSee Translation
- Surendra Solanki में वही बता रहा हूँ। इस लोंगो से बात करते वक्त यही खायल रखना होगा। क्या सोच के लिखा।
जब ये समझ आ जाए क्या सोच के लिखा। वहां पर बुद्धि इस्तेमाल होती। यानी वैश्य अवस्था।See Translation - Surendra Solanki और राज की बात बहुत से इनमे डॉ हैं।
प्रदीप जी त्रिभुवंजी इंद्र जी। में खुदSee Translation - Gopal Jee Amit Jaiswal
घिन आती है ऐसी गिरी हुई मानसिकता के इन्सानों से जो हर चीज को जातिवाद के तराजु पे तौलते हैं
क्या योगदान है राधाकृष्णन का शिक्षा के क्षेत्र में, उनके जन्म दिन पर शिक्षक दिवस मनाते हैं, ज्योतिबा फुले या सावित्रीबाई फुले के जन्म दिन पर नहीं। सही में घिन आती है इस तरह की सोच से।See Translation - Surendra Solanki खाई जो खुदी है उस पर में बहुत प्रहार कर रहा। लेकिन आपको समझ में आये तो न।See Translation
- Gopal Jee Communal Award
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The Communal Award was made by the British Prime Minister Ramsay Macdonald on 16 August 1932 granting separate electorates in British India for the Forward Caste, Lower Caste, Muslims, Buddhists, Sikhs, Indian Christians, Anglo-Indians, Europeans and Untouchables (now known as the Dalits) etc.
The 'award' attracted severe criticism from Mahatma Gandhi, the Akali Dal etc.
As a result of the Third Round Table Conference, in November 1932, the then Prime Minister of Britain Ramsay Macdonald gave his 'award' known as the Communal Award. According to it, separate representation was to be provided for the Forward Caste, Lower Caste, Muslims, Buddhists, Sikhs, Indian Christians, Anglo-Indians, Europeans and Dalits. The Untouchables were assigned a number of seats to be filled by election from special constituencies in which voters belonging to the Untouchables only could vote.
The Award was highly controversial and opposed by Mahatma Gandhi, who was in Yerveda jail, and fasted in protest against it. Once the Depressed Classes were treated as a separate community, the question of abolishing untouchability would not arise, and the work of Hindu social reform in this respect would come to a halt. Communal Award was supported by many among the minority communities, most notably the Untouchable leader, Dr. B. R. Ambedkar. After lengthy negotiations, Gandhi reached an agreement with Dr. Ambedkar to have a single Hindu electorate, with Untouchables having seats reserved within it. This is called the Poona Pact. Electorates for other religions like Muslims, Buddhists, Sikhs, Indian Christians, Anglo-Indians, Europeans remained separate.
Akali Dal, the representative body of the Sikhs, was also highly critical of the Award, since only 19% reservation was provided to the Sikhs in Punjab, as opposed to the 51% reservation for the Muslims and 30% for the Hindus.[1][2] - Surendra Solanki तो खाई खोदने में केवल आंबेडकर का जिक्र क्यों?
आप जरा चश्मा लगाएं। और देखें जो कमेंट मैंने किया कहीं वह इंद्र जी का तो नही।
और जो भी में लिख रहा हूँ। उस पर आप का कोई ध्यान नही आ रहा।
इतने दिनों से बहुत इंटेस लिख रहा हूँ। आज अगर आप को में समझ नही आता तो हम बात करना बन्द कर सकते हैं।
वेसे भी मेरा एक्सपेरिमेंट फिनिश हो चूका है ।See Translation - Surendra Solanki माफी वाली बात नही है। जितना मेने करना था बोलना था। सभी कुछ एक एक्सपेरिमेंट्स था मेरा वो भी मेरे लिए।
अब में आजाद हूँ। आप कोई भी प्रश्न करें। लेकिन उसका उत्तर मिलने के बाद दूसरा प्रश्न करें। आध्यात्मिक उत्तर कई बार मानसिक नही होते इसलिए समझने की कोशिश करें। जब नही समझ आये तो में हूँ।
आभार।See Translation - Indra Deo Singh निश्चित रूप से स्वतंत्रता के पूर्व दलित लोगो की स्थिति सामाजिक, आर्थिक, रूप से बहुत ही निम्न थी,,शोषित तो पूरा का पूरा समाज ही था।करीब करीब पूरा का पूरा का समाज ही भूमि हीन था।जमीन के एक टुकड़े से कम से कम एक वक्त का निवाला तो मिल सकता था।जिम्मे दारी घुरहु कतवारू की तय नहीं की जा सकती थी।अम्बेडकर जैसा शलाका पुरूष जिसके नेतृत्व मे कांस्टिटूशन का निर्माण किया जाता है,,,, जो स्वम् दुर्शध स्थिति से गुजरा,,, उसकी उस समाज का अगुआ होने के कारण उसकी जिम्मेदारी बनती थी प्रत्येक दलित परिवार हेतु भूमि के एक टुकड़े की वैधनिक रूप से ब्यस्था तो करते।स्वयं दलित, ऊपर से दलित का एक मात्र नेता और उससे बढ़ कर संविन्धान सभा के शीर्ष पर बैठा ब्यक्ति किस साजिश, खड़यंत्र, दोगलेपन, दुरभि संधियों का शिकार हो जाता है कि वह सदियो की घाव का उपचार कर सकता था।लेकिन,,!!?!!!!?!????इस लिए भारत के हर ब्यक्ति को अंगुली उठाने का स्वाभाविक सा अधिकार मिल जाता है।प्रश्न पूछने का अधिकार का अधिकारी हो जाता है।और आगे आने वाले समय में हर जिम्मे दार ब्यक्ति को कटघरे में खड़ा किया जायेगा चाहे वह गांधी हो या अम्बेडकर??? इस मामलेमें नेहरूपटेल राजेंद्र प्रसाद आदि नेता दोषी है तो आंबेडकर अपराधी,,,!!!?,जिन्होंने गरीबो को उसके बुनियादी हुकूक से महरूम कर दिए।See Translation
- Surendra Solanki गोपाल जी 1998 में cbse pmt में 1132 रैंक आयी थी आल इंडिया रैंक।
तब से पता हे योग्यता मेरी बुद्धि की साधना मात्र है।See Translation 
- Ramakant Rao Well learned persons of some well established caste misguide ,mislead and misuse his knowledge ,power and religion for the safety of his own society. They propagate principles of unequality and want to enjoy by injustice and befooling others.
- Tribhuwan Singh Ramakant Rao जी अंग्रेजी कमजोर है।
हिंदी में समझाए इस सारगर्भित बात को।
and loud एंड clear तरीके से। 
- Ramakant Rao Andha bate rewdi fir fir apne ko dey.

- Ramakant Rao Pad gaya padhe likho se pala. Mithi chhuri se hua halaal. CHHORA GANGA KINARE WALA.See Translation
- Surendra Solanki वर्ण व्यवस्था का मुख्य आधार कर्म।
में इसे खारिज कर इसका आधार चेतना को ला रहा। और सभी के सभी कर्मो को क्षत्रिय करार दे रहा।
मेरी नई वर्ण व्यवस्था।
ब्रह्म पुरुष के चार हिस्से।
शुद्र मन
वैश्य बुद्धि
क्षत्रिय कर्म
ब्राह्मण विवेक।
बाहिरी वर्ण के नाम सिर्फ टैग। अन्तःकरण में ब्रह्म पुरुष मन बुद्धि कर्म और विवेक से संसार इंटरेक्शन करता।
जो जिस समय इस्तेमाल हो वही उस समय का वर्ण और सभी स्तर पर ब्रह्म पुरुष की चेतना काम करती।See Translation 
- Indra Deo Singh गोपाल जी
साधु वाद
यह मेरी दर्द है
जिसको मैंने अपने उपरोक्त विवरण में दिया।
अम्बेडकर का कद उस समय कुछ मामले में गांधी से भी बड़ा था।हिंदुस्तान के सबसे ताकत वर ब्यक्ति में एक।
विद्वता और सामाजिक सेवा का अद्भुत संगम।
*आज दलित समाज आरक्षण ही बाबा का एक योग दान मानती है जब कि वह खुद ही इसके विरोधी थे,यह इक असली इलाज नहीं था ंं़ंSee Translation - Suhanand Bagale · Friends with विकास असाटी and 1 otherkash aap Dr Ambedkar k jamaneme paida hote aur aap ko sari sachyai unhike muh se sunaneko milati,AAj aapke saval ka jawab koi nahi de sakta,AApka Ambedkar ko hinduvirohi/deshvirodhi sabit kaneka prayatna sarhaniya hai. Keep it upSee Translation
- Tribhuwan Singh Suhanand Bagale जी रुदवाली न करे ।
तथ्यात्मक बात करे। - Suhanand Bagale · Friends with विकास असाटी and 1 otherAapne kabhi achut honeka sukh bhoga hai?See Translation
- Tribhuwan Singh आपने भोगा है क्या
- Suhanand Bagale · 2 mutual friendshan,aur aaj bhi gao me bahot log hai jo bhog rahe haiSee Translation
- Tribhuwan Singh अब तो नही है न तो रुदौली और विरुदावलि का अर्थ
- Tribhuwan Singh आप गांव में नही रहते ।
मैं रहता हूँ - Suhanand Bagale · Friends with विकास असाटी and 1 othersabse pahle "swachch Darma" abhiyan chalana jaruri hai, koi bacward cast wale vyakti ko koibhi ek pith ka shankarcharya banaya jaye to mane.
- Tribhuwan Singh बाबा की किरपा मिल चुकी क़ि आने वाली है ??
- Suhanand Bagale · Friends with विकास असाटी and 1 othermai to khudko Hindu samzata hu ,mere pas certificate bhi hai cast ka jisme mera dharm bhi likha hai,par mere jaise bahot log hai jo dharmantaran karneki soch rahe hai. kyu?See Translation
- Suhanand Bagale · Friends with विकास असाटी and 1 otheris sawal ka jawab khudko mahatma samaznewale har aadmi talte aaye hai. Kya yogyata hai shankaracharya bananeki?

- Ramakant Rao Shankaracharya kewal brahman hi ho sakta hai. Kyuki anya log pavitra aur shuddh nahi hote. Baki log apne ko hindu bolkar garv ka anubhav kare. Itna unke liye kaafi hai. No jaativaad ,no reservation. Brahman is never wrong. No cross question.
- Tribhuwan Singh ये किसने बताया आपको Ramakant Rao ji ??
- Tribhuwan Singh आइये अलाहाबाद ।
अन्य वर्ण के शंकराचार्य से मिलाता हूँ। 
- Ramakant Rao Kaashi k brahmano se puchh lijiye. Ye unhi ki bhasa hai. Sanatan dharm k rakhwale.See Translation
- Tribhuwan Singh आपकी अज्ञानता के लिए न मैं जिम्मेदार हूँ न वो आभासी ब्राम्हण Ramakant Rao ji .
- Tribhuwan Singh Suhanand Bagale जी कोई आपको रोकेगा नहीं ।
आप जैसे लोग जितनी जल्दी ये काम करें उतना ही शुभ।
कोई रोके तो मुझे फोन करना। 
- Ramakant Rao Hindu system k governer brahman hi hai aap maane ya na maane mujhko koi fark nhi padta.
- Tribhuwan Singh मैं आप के लिए नही आप के बच्चों के लिख रहा हूँ।Ramakant Rao जी

- Ramakant Rao Vishwamitra ko apni yogyata siddh karne k liye kya kya nhi karna pada. Iske baavjud bhi brahmano ne unko o samman nahi diya jiske o haqdaar the.See Translation

- Ramakant Rao Vishwamitra ka dos itna hi tha k unka pita brahman nhi tha anyatha o brahmano se kisi mamle me kam nhi the.See Translation
- Kaushal Dave Ramakant Rao ऐसी ओछी और मूर्खतापूर्ण बात करने की हिम्मत आप की आज संविधान ही दे सकता है| अपने सामान्य ज्ञान की जांच किसी मनोवैज्ञानिक से करवाओ | महर्षि विश्वामित्र एक ब्रह्मऋषि हैं | उन्होंने वेदों में ऋग्वेद और मंत्रो में गायत्री मंत्र का प्रणयन किया था |See Translation

- Ramakant Rao Unko brahmarshi itni aasani se nhi mil gaya tha. Iske liye unko gayatri mantra k prabhav ka istemaal karna pada thaa.See Translation
- Gopal Jee त्रिभुवन सर वर्तमान में चारों मठों के शंकराचार्य कौन हैं बताने की कृपा कीजियेगा। यूँ ही जानकारी के लिये पूछ रहे हैं।See Translation

- Gopal Jee Google में खोजे सर पता नहीं का-का लिख देता है पर वर्तमान में कौन है नहीं बताता है।See Translation

- Ramakant Rao Manu-smriti k anusaar to kewal jinda rahne ki hi ijaajat thi, o bhi kripa par.See Translation
- Kaushal Dave आप को अपने प्रश्नो के उत्तर नहीं चाहिए, आप को केवल अपनी दोषारोपण की क्षुधा शांत करनी है | इस तरह की एकतरफा उतावलापन आप को सही राह पे नहीं ले जाएगा | मनुस्मृति पड़ी है आपने ... एक बार ऋग्वेद पढ़ लीजिये अगर आप को समझ आ गया तो इसी उतावलेपन पे ग्लानि होगी | रही बात शंकराचर्य जी की तो कृपया पूरी के स्वामी निश्च्लानंद की बातों पे ध्यान न दें | वे उन के पूर्व के द्वारा उक्त नहीं हैं |See Translation

- Ramakant Rao Aapne bolne k liye samvidhan ko quote kiya isliye bolna pada.vedo me kahi hindu shabd aaya hi nahi aur hindu dharm ki baat chal rahi hai. Kahi kisi puran me hindu shabd aaya ho to jarur bataiyega. Vaise agar mai gyani hota aur purn hota to dunia meri puja karti, par shayad aap log gyani aur purn hai.See Translation
- Arvind Pandey Ramakant RaoRap sir ji
Mujhe nahi pata ki mujhe is par tippadi karana chahiye ya nahi.kintu mai kar rahaa hoo....See MoreSee Translation - Tribhuwan Singh Ramakant Rao जी हिंदी में लिखे या अंग्रेजी में।
खिचड़ी न लिखें ।
और न लिख संके तो न लिखे।...See More - सम्यक् दृष्टि · 11 mutual friendsIndra Deo Singh ji, आप का दलितों के प्रति प्रेम और सद्भावना देखकर दिल भर आया , यकीन मानिए अभी तक खुशी के आँसू रुक नहीं रहे हैं..|.मान गये आप को ! कितनी सफाई से शब्दों से खेलकर अपनी खुंदक निकाल ली और बाबा के लिए दोगलेपन शब्द का भी प्रयोग कर लिया.. लेकिन दलितों को जमीन से सही में वंचित करने वाले दोगलों को एक शब्द भी नहीं कहा... कोई बात नहीं... पहले आप ये बता दीजिए कि जब डा. अम्बेडकर हिन्दू कोड बिल के माध्यम से स्त्रियों और पिछड़ों को अधिकार दिलाने की कोशिश कर रहे थे ,जिसमें स्त्रियों के लिए सम्पत्ति का अधिकार भी शामिल था ( सम्पत्ति का अधिकार सभी वर्ण की स्त्रियों के लिए था ) उसका विरोध किन सद्धर्मियों ने किया था और इस बिल का क्या हश्र हुआ था? जो सदाशयी अपनी बहन, बेटियों तक को सम्पत्ति का अधिकार देने की बात हजम नहीं कर पा रहे थे वो केवल दलितों को भूमि का अधिकार देने देते ?.. धन्य है आप की सोच महाप्रभु ! .....See Translation
- Gopal Jee त्रिभुवन सर हिन्दू होने के नाते ये जानना जरुरी लगता है की चारों मठों के शंकराचार्य कौन हैं? कृपया ज्ञानवर्धन करने की कृपा करें।See Translation
- Tribhuwan Singh क्या करेंगे जान के ??
क्या सद्बुद्धि आ जायेगी ?~ - Tribhuwan Singh और जानना ही है तो किसी संत महात्मा का गोड पकड़ लीजिये आपके ज्ञान की छुधा शांत हो जायेगी।
- Surendra Solanki त्रिभुवन सर हिन्दू होने के नाते ये जानना जरुरी लगता है की चारों मठों के शंकराचार्य कौन हैं? कृपया ज्ञानवर्धन करने की कृपा करें।
इनको यह जानने के केवल इक्षा हे। चारो जन्म से ब्राह्मण हैं और ब्राह्मण कर्म करते हैं।
चेतना के स्तर पर ये नही जाना चाहेंगे वहां पहुँच गए तो सारी कहानी बदल जायेगी।See Translation - Tribhuwan Singh सम्यक् दृष्टि जी अगर आपको संवाद करना है मेरे वाल पे तो सशरीर आये।हम सगुण उपासक हैं निर्गुण नहीं।
वरना न आएं ।
या फिर आपको ब्लाक करूंगा।
क्षदम्भेशी और मुहंचोर लोगों का मैं स्वागत नहीं करता। - Tribhuwan Singh Gopal Jee बकवास करना बंद करे या ब्लाक करूँ।
मूर्खो और क्षदम्भेशियो को हद से ज्यादा बर्दाश्त नही करता मैं । - Gopal Jee आप मेरी सद्बुद्धि बढ़ा सकते हैं क्योंकि आप कथित रूप से क्षत्रिय हैं इसलिए आप ऐसा कह सकते हैं, मै आपकी बुद्धि कम होने नहीं दे सकता। मै ऐसा नहीं कह सकता क्योंकि मैं शुद्र हूँ। और ये बात आपको बकवास लगती है।See Translation
- Arvind Pandey Gopal Jee Sayad aap bhramit nahi hai aap ko satya ka gyan hai
kintu aap apni Dalit chintan ki dukan band na ho isliye aap jaise chintak logo ko bhramit kar rahe hai.
kripya apni chintan ki awdharna badale aur wakai dalit hit ki bat kareSee Translation - Tribhuwan Singh Gopal Jee ये लास्ट वार्निग है।
मूर्खता बंद करे या असली ID से आएं - Tribhuwan Singh और शुद्र तो मर बिला गए । अब कहाँ बचे हैं ।
- सम्यक् दृष्टि · 11 mutual friendsआप को विचारों से डर लगता है,ये मैं भी समझ चुका हूँ | छद्मभेषियों के उपासकों से बात करने का मुझे भी शौक नहीं | मैं आप के वाल पर नहीं आऊंगा आप निश्चिंत होकर अपनी विद्वता का सर्टीफिकेट अपने सहयोगियों से लेते रहिए, अलविदाSee Translation
- Arvind Pandey Tribhuwan Sir ji Ye Gopal Jee jaise bahurupi vayktitaw ke log hi dusprachar kar ke apni dalit chint ki dukan chalate hai aur jab satya ka samna karana padata hai ye tark kutark karke
logo ko bhramit karte hai.
taki dukan chalati rahe.See Translation - Arvind Pandey Sir (Tribhuwan sir)ye agar sudra ko jinda nai rakhenge to inka dhandha chaupat ho jayega.
aur ye karmheen prani kaise aish karenge. - Tribhuwan Singh सम्यक् दृष्टि जी या तो अपनी ID के साथ आएं या फुट लें यहाँ से।
ब्लाक होने के अपमान से बच जाएंगे। - Arvind Pandey ye Samyak Drishti wale mitra dalito ke kaphi chintak lag rahe lekin sirf vicharo seSee Translation
- Gopal Jee Arvind Pandey
Tribhuwan Sir ji Ye Gopal Jee jaise bahurupi vayktitaw ke log hi dusprachar kar ke apni dalit chint ki dukan chalate hai aur jab satya ka samna karana padata hai ye tark kutark karke
logo ko bhramit karte hai.
taki dukan chalati rahe.
सर जी एक सीधा सा प्रश्न कर रहा हूँ उसका जवाब भी नहीं दे रहे आपलोग उल्टा मुझ पर बकवास करने का आरोप लगाया जा रहा है, block करने की धमकी दी जा रही है।See Translation - Kaushal Dave द्वारका मठ - स्वामी स्वरूपानंद
श्रृंगेरी मठ - महास्वामी भर्ती तीर्थ
ज्योतिर्मठ - स्वामी विष्णुदेवानंद
गोवर्धनमठ - स्वामी निश्च्छलानन्द
और क्या आप कमाल की बात जानते है, श्री निरंजनदेव तीर्थ के पहले कोई भी उत्तर भारतीय शंकराचार्य नहीं बन पाया था, वो सभी दक्षिण भारतीय थे, जिन्हे आज का खोखला ज्ञान द्रविड़ कहता है | और ऐसा इसी लिए नहीं हुआ, की कोई उत्तर भारतीय शिष्यों या कथित आर्यों के खिलाफ साजिश कर रहा था | बल्कि बात बस इतनी थी उन के पहले कोई उत्तर भारतीय बन ही नहीं पाया था | लेकिन उत्तर भारतीय शिष्यों ने आर्य और द्रविड़ की राजनैतिक खिचिड़ी नहीं पकाई |See Translation - Kaushal Dave ये सब तो आप जैसे कथित दलित चिंतकों के काम है | आज भी इन लोगों के सानिध्य में कभी नेत्र चिकित्सा शिविर, कभी पोलियो शिविर कभी सामान्य चिकित्सा शिविर लगते रहते है | कभी महिला मुक्ति और उत्पीड़न के खिलाफ कभी गौहत्या और पशुहत्या के खिलाफ ये खड़े हो जाते है | अगर कोई जाती (संविधान द्वारा अंकित) का मनुष्य भी ये महानुशासन पालन करे तो शंकराचार्य बन सकता है |
परन्तु आप जानते है की हॉस्पिटल्स में, सरकारी नौकरियों में, राजनीति में, यहाँ तक की स्कूलों और महाविद्यालयों में भी संविधान द्वारा उक्त दलित, संविधान द्वारा उक्त सामान्य लोगो के साथ क्या व्यवहार करता है, जब उसे हर जगह पका पकाया मिल जाता है | आप इन पे सवाल नहीं उठाएंगे क्यों की आप की अकर्मण्यता छोड़नी पड़ेगी |See Translation - Kaushal Dave आप आज के सिफ मीणा समाज को ही ले लीजिये ias , ips, irs क्या नहीं है | राजस्थान के ज्यादातर उच्च पदासीन मीणा समाज के लोग ही है | इसे कहते हे जातिवाद | और ज्यादा मजे की बात ये है की ये पहले से ही सम्पन्न थे ये कभी गरीब थे ही नहीं | और यही कारण रहा की आज कोई और दलित समाज राजस्थान में उठ नहीं सका है | Cannibalisation का नाम सुना है | ये हुआ है | जाट गुर्जर मीणा इस के अलावा आप कोई नाम नहीं सुनेंगे राजस्थान में, जरा यहाँ की राजनीती टटोलिये | और ये सब आपके बाबा साहेब के संविधान के अनुसार हो रहा है वहाँ | जरा अपने ही भाइयों से पूछिये वहां के की साटन, खटीक, रेगर के घरों के ये पानी क्यों नहीं पीते | मेरे तो कई रेगर दोस्त हैं जिनके साथ में कंधे से कन्धा मिला का आज तक चलता आ रहा हु | इन लोगों ने तो आरक्षण पाया हे उन्ही लोगों के साथ अछुतों का व्यवहार क्यों करते हैं इन्हे तो इस कुप्रथा की खिलाफत में सबसे आगे होना चाहीयेSee Translation
- Kaushal Dave राजस्थान की भंवर देवी का किस्सा सुना है कभी | उन की पूरी जाती के खिलाफ पुरे वही लोग जिन्होंने संविधान के अनुसार आरक्षण पाया है |See Translation
- Kaushal Dave गोपाल जी, बाबा साहेब बुरे नहीं थे लेकिन उन्होंने कोई गलतियां नहीं की थी ये कोई कैसे कह सकता है | गलतियां कौन नहीं करता | उन से कई जगह बहुत भयंकर गलतियां हुई है | अच्छी बात ये थी की उन्होंने कई बार अपने गलतियां मानी भी है तभी वो बाबासाहेब बने | उन्होंने...See MoreSee Translation

- Ramakant Rao Yahaa to aapko yes man chahiye jisko aap sunkar khush ho sake, koi baat nahi aap khush rahe.See Translation
- Kaushal Dave जी (आप जैसे) चिंतकों की समस्या यही है की लोगो की छोटी से भी ख़ुशी आप को हज़म नहीं होती है और उस पर आप लोगों की खीज साफ़ साफ़ नज़र आती है |
अपने छोटे से दिमाग में आपने ये भी मान लिया की मुझे अपने comments पे likes देख के असीम आनंद की प्राप्ति हो रही है |और अगर हो भी रही है तो आप को चुभ रही है | बता सकते है क्यों ??
दलित चिंतको में प्रायः ये बात पाई जाती है | उन्हें अपने से ऊपर कोई दलित भी नहीं चाहिए |
पता है मेरे जैसे कई लोग ऊब चुके है उन से जिनका मकसद सवाल पूछना नहीं सिर्फ सवाल खड़ा करना होता है, क्यों की वो अपने मतलब का जवाब पहले से ही अपने मन में धरे हुए होते है | और जिसे "yes man" चाहिए होता वो किसी भी पक्ष को नाराज़ नहीं करता है भले ही वो सही हो या आप जैसा | आप तो छोटा सा मनोविज्ञान भी समझने में नाकाबिल हैं |See Translation - Kaushal Dave या तो अपने बने काल्पनिक कपोल सृष्टि में लगे रहो और न बहार निकालो न किसी को निकलने दो | क्यों जिज्ञासा के लिए सवाल पूछने में थोड़ी सी बहादुरी चाहिए, खुद को उस क्षेत्र का अज्ञानी मानने की | और अगर आप खुद को ज्ञानी समझते हो स्वागत है हमारी जिज्ञासा शांत कर दो | वो अंग्रेजो में कहते हैं न broad-mindedness |See Translation
- Kaushal Dave एक और थे आप जैसे दिलीप सी मंडल जी (@Dilip C mandal) , उन की वाल पे ज़रा जा के देख लो | अपने आप को गरीबों का मसीहा मानते है | मुझे उन के कुछ सवाल अच्छे लगे | परन्तु जब मैंने उन से कुछ सवाल किये मैंने तो वो और उन के अनुयायी वहो राग अलापने लगे और एक का भी उत्तर नहीं दिया | यहाँ तक की मेरे कुछ comments भी मिटा दिए |See Translation
- Tribhuwan Singh Kaushal Dave ji अब वो नहीं रहे।
फेसबुक से गुजर गए। - Saumya Srivastava एक शोक सभा आयोजित कर लीजिए , उनके फेसबुक एकाउंट की आत्मा की शांति के लिए. ......See Translation
प्रदीप सिंह आइना शायद ख़ुद को ही दिखाते हैं
Gopal Jee Surendra Solanki
दलितों हेतु अम्बेडकर का सबसे historcal योगदान है कि उन्होने दलितों और बाकी समाज के बीच इतनी बड़ी खाई खोदी कि उसको कभी भरा नहीं जा सकता।क्योंकि एक एक चमार पासी आदि ko उसको उसी नाम से बुलाने का legal right मिल गया!
जे वर्णधाम तेली, कुम्हारा, स्वपच किरात कौल कलवारा।
ये खाई किसने खोदी है सोलंकी जी।
दलितों हेतु अम्बेडकर का सबसे historcal योगदान है कि उन्होने दलितों और बाकी समाज के बीच इतनी बड़ी खाई खोदी कि उसको कभी भरा नहीं जा सकता।क्योंकि एक एक चमार पासी आदि ko उसको उसी नाम से बुलाने का legal right मिल गया!
जे वर्णधाम तेली, कुम्हारा, स्वपच किरात कौल कलवारा।
ये खाई किसने खोदी है सोलंकी जी।
Tribhuwan Singh आभार Gopal Jee
Kaushal Dave Hahahahaha












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