Tuesday, 29 September 2015

तो अंबेडकवादी, कहां इतर हैं गतिहीन ब्राह्मणवाद से...? --------------------------------------------------------------प्रस्तावना : भाग -4

  • Tribhuwan Singh पहली बात तो ये समझ लिया जाय मॅक्समुल्लर ने और उनके पहले के तथाकथित इंडोलॉजिस्ट या फिलोलॉजिस्ट "आर्य " को एक अलग नस्ल (रेस ) घोषित करने के पहले , इस शब्द का मतलब क्या निकाला था / उनके हिसाब से आर्य माने संस्कृत बोलने वाले लोग / आर्य का सही मतलब मैं बाद में बताऊंगा , लेकिन पहले ये समझ लिया जाय कि आर्यों को एक अलग नस्ल सिद्ध करने के पीछे क्या घड्यंत्र था / अंग्रेजों को चलिए भारतीय राजनीति में , हिन्दुओं को बांटने के तो राजनैतिक स्वार्थ थे ,लेकिन जर्मनों को क्यों रूचि थी ? और हिन्दुओं का पवित्र स्वस्तिक का चिन्ह क्रिस्चियन हिटलर का लोगो / पहचान कैसे बना ?
  • Tribhuwan Singh
  • Tribhuwan Singh अगर आर्य का मतलब संस्कृत बोलने वाले लोंगो से था ,,तो यूरोप और जर्मनी के लोग आर्य कैसे बने ,,क्या मात्र पितृ मातृ के फोनेटिक पितर या मतर जैसी संभावित वर्तनी के मिलते जुलते स्वरुप के कारन ?
  • Tribhuwan Singh
  • Tribhuwan Singh पहले बात इस पर किया जाय कि जर्मन निवासियों की भारतीय संस्कृत के पुस्तको में और संस्कृत भाषा में क्यों रूचि थी ?
  • Arun Kumar
  • Arun Kumar Sir, प्रश्न आप का है। जवाब आप ही दें। PleaseSee Translation
  • Tribhuwan Singh
  • Tribhuwan Singh इसके पहले एक संक्षिप्त टिप्पड़ी करना चाहूँगा उन relegions के बारे में जिनको अब्राह्मिक relegions के नाम से जाना जाता है । जिनकी cosmology के अनुसार जिनके प्रथम पूर्वज अब्राहम/इब्राहिम थे। इनमे 3 relegions है। Jews, christians और इस्लाम। ये monogod (एक गॉड एक अल्लाह ) और उसके masenger यानि उनके पैगम्बर पर आधारित फलसफा हैं। अंग्रेजी में उनको Monotheism कहते हैं। और उनका दावा है कि उनके भगवान् ही सच्चे भगवान है। और उनका धर्म ही असली धर्म है ।बाकी धर्म झूठे है । jews के messanger Moses या मूसा, च्रिस्तिंस के messanger Jesus , और मुसलमानों के पैगम्बर मोहम्मद ।जो इनको न माने वो infidel या मुशरिक / काफिर , या Pagan या heathen के नाम से जाने जाते है , इनकी धर्म परंपरा में।उनके साथ क्या व्यवहार करना चाहिये , मैं इस पर बात नहीं करूंगा । लेकिन समयकाल इनके उत्त्पत्ति की क्रमशः 4000 साल पूर्व , 2000 साल पूर्व और 1400 साल पूर्व।
     
    • Tribhuwan Singh समयकाल का वर्णन इसलिए कि आगे आने वाले कमेंट्स में इस समयकाल का काफी महत्व है। मैं इन धर्मो के blasphemy, evangical, हेरेटिक और apostatic, और apologetical philosophy पर बात नहीं करना चाहता , क्योकि मेरा उद्देश्य विवाद उत्पन्न करना नहीं है , बल्कि उसे सुलझाना है।
    • Arun Kumar
    • Arun Kumar समय काल का ही महत्व है। हम तो निमित्त मात्र है। अपना योगदान देना ही हमारा कर्म है। आप अपने कर्म को सराहनीय रुप से निभा रहें। साधुवाद।See Translation
    • Tribhuwan Singh
    • Tribhuwan Singh christianity के प्रोफेट जीसस पैदायशी तौर पर यहूदी थे । उनकी मत्रिभाषा Hebrew थी। लेकिन उन्होंने जिस धर्म का फैलाव किया उसको उनके शिष्यों ने खास तौर पर संत पॉल ( pl recorrect if I am wrong) ने उसको Christian- ity के नाम से प्रचारित किया। लेकिन तथाकथित म...See More
    • Tribhuwan Singh
    • Tribhuwan Singh बाद में slavery और गुलामी का ट्रांसलेशन भारत के सनदर्भ में दास शब्द से किया गया । जबकि दोनों में बहुत ख़ास फरक है।
    • Arun Kumar
    • Arun Kumar Slavery और दासता मे क्या फर्क है।सरSee Translation
    • Tribhuwan Singh
    • Tribhuwan Singh slavery और गुलामी वो है ,जिसका अनुभव पूर्व में अफ्रीकी नीग्रो ( ढेर सारे भारतीय भी, जो आज marisus जैसे जगहों पे थे, colonial era में।slave और गुलाम वो है , जिनके पास ड्यूटी तो होती है , लेकिन अधिकार नहीं होते।
      और दास एक अलग परंपरा है , जिनके पास धर्मस
      ंगत ड्यूटी भी होती है , और अधिकार भी । वो उनके खिलाफ आवाज उठा सकते है जिनकी सेवा में वे नियत किये गए हैं । उदाह्रंस्वरूप आप विष्णु शर्मा के पंचतंत्र को पढ़िए ।
      और अगर ज्यादा समझना है, bina मेहनत के तो तुलसीदास कबीरदास रहीमदास के नामों को याद करिए । ये slave/ गुलाम थे, कि गुलामी से मात्र शरीर ही नहीं आत्मा के बंधन खोलते थे।
       
      • Tribhuwan Singh शुभरात्रि बोलने के पहले एक कमेंट, जिसका इस पोस्ट से कोई सम्बन्ध नहीं है।- Monotheisn/One God थ्योरी, भगवान् के बारे में आने के पहले, क्रिश्चियनिटी के पूर्व यूरोप में ग्रीक रोमन सभ्यता में, और अरब में इस्लाम के आने के पूर्व, बहुदेववाद का ही प्रचलन था। अ...See More
      • Tribhuwan Singh
      • Tribhuwan Singh यूरोपीय देशों के भारत पर आधिपत्य जमाने के दौरान गीता और कालिदास द्वारा रचित शकुंतला जैसे ग्रंथों का यूरोपीय भाषाओँ में जब अनुवाद हुवा , और वहां के विद्वानों ने उनको पढ़ा , तो एक नयी ज्योति उनको देखने को मिली ।प्रकृति को समझने की दिशा में, बाइबिल में जिन प्रश्नों के उत्तर उनको नहीं मिल रहे थे, उसके उत्तर खोजने के लिए वहां जो नई चेतना का जन्म हो रहा था , उनके उत्तर इन ग्रंथों ने दिए।
      • Tribhuwan Singh
      • Tribhuwan Singh इसके पहले, आप सब इस तथ्य से विज्ञ हैं कि 1600 AD के आस पास ब्रूनो नामक वैज्ञानिक को चर्च ने 7 साल के कारावास के बाद , आग में जलाकर मार डालने की सजा दी थी, सिर्फ इस बात के लिए ,कि ब्रूनो ने कहा कि सूर्य स्थिर है और पृथ्वी उसका चक्कर लगाती है इसको heliocentric theory के नाम से जाना जाता रहा है। (भारतीय वैज्ञानिकों ने अपने ग्रंथो में न जाने कितने साल पहले इसका वर्णन किया हुवा है)।
        खैर बाद में ब्रूनो को "विज्ञानं के शहीद " की उपाधि दी गयी।
        इसीतरह galiliyo को भी इसी वैज्ञानिक तथ्य को आगे बढाने के कारण आजीवन गृह कैद दिया गया।
        अब मजे की बात 2000 AD जब ब्रनो का 400 साल की वर्षी मनाई गयी, और यूरोप के शीर्ष चर्च के पादरी से पूंछा गया कि क्या चर्च ब्रूनो की हत्या को पश्चाताप करना चाहता है , तो उसने कहा कि -एकदम नहीं , ब्रूनो को अपने बचाव में अपनी बात कहने का पूरा मौका दिया गया।
        अंत में बाइबिल ये मानती है कि धरती स्थिर है, और सूर्य चलायमान है।
      • Tribhuwan Singh
      • Tribhuwan Singh अब आते हैं बाइबिल के कुछ और तथ्यों पर जिनको आधार बनाकर भारत के ग्रन्थों का बाइबिल के पात्रों से जोड़ने के प्रयासों पर।
        बाइबिल में Genesis चैप्टर में cosmology के अनुसार जब महान बाढ़ (deludge) आई तो गॉड ने Noah से (इस्लाम में नूह) से कहा कि तुम दुनिया के
        जितने जीव है उनका एक जोड़ा ले लो और एक नाव बनाओ (ark ऑफ़ Noah) और इस नाव में सबको सुरक्षित रख कर चले जाओ , जिससे इस प्रलय के बाद दुनिया फिर से आबाद हो सके।
        Noah ने वही किया और दुनिया के सारे जीव दुबारा आबाद हुए।
        Noah के तीन पुत्र थे -Jepheth Shem और Ham।
        प्रलय ख़त्म होने के बाद गॉड ने फिर Noah से कहा कि कुछ खेती बाड़ी करो।
        उन्होंने अंगूर की खेती की और उससे शराब बनाई। और शराब पीकर किसी दिन लापरवाही में निर्वस्त्र हो गए,तो Ham ने उनकी दशा के बारे में बाकी दोनों भाइयों को बताया ,और साथ में उसको हंसी आ गयी।
        इस पर noah ने Ham को curse किया कि तुम्हारे इस अपराध के लिए तुम और तुमसे उत्पन्न संतानो की संताने,तुम्हारे दोनों भाइयों के वंशजों के गुलाम होंगे ,- (Perpetual servitude )
        अब इसका जिक्र क्यों ??
        क्योंकि बाइबिल के अनुसार पूरी दुनिया Noah के इन्ही तीन पुत्रों की वंशजों से ही बसने वाली है।
        "God blessed Noah and his sons , and blessed unto them,be fruitful and multiply, and replenish the earth "9.1Genesis.
        क्योंकि आने वाले वर्षों में जब यूरोपियन क्रिस्चियन पूरी दुनिया पर कब्ज़ा करने वाले थे, गुलाम बनाये हुए देशो को Ham के वंशजों की संताने मानकर उनकी गुलामी को biblicle फलसफा के अनुसार उचित ठहराने वाले है।
        बाद में उन्होंने भारत और अफ्रीका के लोगों को Hamatic
        अरबी लोगों को Semetic
        बाकी white यूरोपियन Jepheth के वंशज।
        ये मत्वपूर्ण इसलिए भी है कि आगे जब हम सवर्ण और अवर्ण (असवर्ण) की बात करेंगे तो समझ में आएगा की ,वर्ण का मतलब चमड़ी के रंग से है , जिन्होंने इस सबंध की व्याख्या की उसका सम्बन्ध संस्कृत ग्रंथो से नहीं बल्कि उसकी जड़ें बाइबिल में छुपी है।
         
        • Tribhuwan Singh विल्लियम जोंस ने जब १८वॆ शताब्दी के अंत में संस्कृत की तुलना लैटिन और ग्रीक से किया और उसको उन भाषाओँ से उन्नत घोषित किया, और फिर बाद में ये प्रचारित किया कि -"संस्कृत सारी भाषाओँ कि जननी है ,,,जिसको आज भी बहुतायत भारतीय जनमानस गर्व के साथ स्वीकार करता है, तो वे उस साजिश को नहीं समझ पाते कि इस घोषणा के पीछे एक ईसाईयत मानसिकता काम कर रही थी /
          क्या है वो ईसाईयत मानसिकता ??
          बाइबिल में दुनिया की विभिन्न भाषाओँ के उत्पत्ति के बारे में GENESIS में जिक्र है, जिसमे लिखा है की बाढ़ या महाप्रलय के बाद जब संगठित ह्यूमैनिटी जब पूर्व से निकलकर आगे बढ़ी , तो गॉड ने उनसे कहा कि एक विशाल टावर बनाओ जिसकी ऊंचाई स्वर्ग तक हो/ लोगों ने जब उस टावर को बनाया इसको बाइबिल में टावर ऑफ़ बेबल (स्वर्ग का द्वार) कहा गया है ,तो गॉड फिर आये और उन्होंने कहा कि तुम लोग एक ही भाषा बोलते हो , लेकिन जब पहले जब गॉड ने बोल दिया कि जेफेथ सैम और हम कि संतानों को पूरी दुनिया में बसना है ,तो वो उन जगहों कि अलग भाषा को समझेगे कैसे ,,इसलिए गॉड ने विभिन्न भाषाएँ बनाई /
          अब बाइबिल के इस तथ्य को सच साबित करने के लिए संस्कृत एकदम उचित भाषा थी ,जिसको दुनिया कि समस्त भाषाओँ कि जननी बताना आवश्यक था/ और यही बात जोंस ने अपने निष्कर्षों में घोषित किया /
          अब एक बात ये थी कि ये टावर बेबीलोन के आसपास या ईरान के आसपास बनाया गया था , इसलिए संस्कृत को इंडोईरानियन ,और संस्कृत बोलने वाले आर्यों को इंडोईरानियन रेस घोषित किया जाना लाजिमी था /
        • Tribhuwan Singh
        • Tribhuwan Singh अब संस्कृत भाषा को बोलने वाले लोगो (आर्यों) को इंडो ईरानियन घोषित करने के बाद और आगे की यात्रा - कैसे हुई ??
          संस्कृत को इंडोयूरोपियन और इंडोजर्मन भाषा घोषित किये जाने , और संस्कृत भाषा को बोलने वाले लोगो (आर्यों) को इंडोयूरोपियन और इंडोजर्मन नस्ल / रेस घोषित होने के पूर्व अब यूरोप और जेर्मनीयों की रूचि ,,इस भाषा और इसको बोलने वाले लोगों (आर्यों) में क्यों बनी इस पर कुछ चर्चा /
        • Tribhuwan Singh
        • Tribhuwan Singh यूरोप और क्रिश्चियनिटी का पिछले ५००-१००० सालों की यात्रा खूँरेजी की कहानी है / इतनी लड़ाइयां हुयी कि उनका अंदाजा लगाना मुश्किल है / कितने लोग मारे गए ,इसको बताना मुश्किल है / फ्रांस और जर्मनी नेपोलियन के अंतिम लड़ाई तक ,,न जाने कितनी लड़ाइयां लड़े /
          १५००
          ई के बाद जब यूरोपीय देशों ने पूरी दुनिया में पहुंचकर अपनी कॉलोनियां बसाई ,,तो इंग्लॅण्ड के पास १८ वीं शताब्दी तक भारत के साथ और न जाने कितने देश उसके कब्जे में थे / फ्रांसीसी हालांकि भारत में पैर न जमा सके ,, लेकिन अमेरिका में उसकी काफी तगड़ी पकड़ थी / नेपोलियन से पराजित जर्मनों के पास देश में बहुत निराशा और हताशा थी ,, और उनकी रूचि कॉलोनी स्थापित करने में भी नहीं थी / दूसरे फ्रांस के पास महान रोमन संस्कृति के उत्तराधिकारी होने कि धरोहर थी , इसलिए उसका मनोबल काफी ऊँचा था / तीसरे यूरोपीय और खास तौर से फ़्रांसिसी , जर्मनियों को बर्बर राष्ट्र कहते थे , जिन्होंने रोमन सभ्यता को नष्ट किया /
          ऐसे उस निराशा के माहौल में जर्मन राष्ट्रवादियों को कुछ ऐसा चाहिए था , जो उनके राष्ट्र्रीय अस्तित्व और स्वाभिमान को पुनर्षठापित कर सके / मैक्समूलर और उसके बाद जितने भी जर्मन राष्ट्रवादी थे , जब उनको ये मौका मिला कि आर्य एक नोबल रेस थी ,,,जो कहीं बाहर से आयी थी ,,तो उन्होंने हांथोहान्थ इस मौके को लपक लिया / जिससे जर्मनी ने एक नवीन राष्ट्रवाद का उदय Indogerman भाषा संस्कृत , और संस्कृत बोलने वाले लोगों (आर्यों) पर अपनी दावेदारी ठोंक दी / ये काम उन्होंने कैसे किया ? ये बाद में /
           
          • Tribhuwan Singh यूरोप और क्रिश्चियनिटी का पिछले ५००-१००० सालों की यात्रा खूँरेजी की कहानी है / इतनी लड़ाइयां हुयी कि उनका अंदाजा लगाना मुश्किल है / कितने लोग मारे गए ,इसको बताना मुश्किल है / फ्रांस और जर्मनी नेपोलियन के अंतिम लड़ाई तक ,,न जाने कितनी लड़ाइयां लड़े /
            १५००
            ई के बाद जब यूरोपीय देशों ने पूरी दुनिया में पहुंचकर अपनी कॉलोनियां बसाई ,,तो इंग्लॅण्ड के पास १८ वीं शताब्दी तक भारत के साथ और न जाने कितने देश उसके कब्जे में थे / फ्रांसीसी हालांकि भारत में पैर न जमा सके ,, लेकिन अमेरिका में उसकी काफी तगड़ी पकड़ थी / नेपोलियन से पराजित जर्मनों के पास देश में बहुत निराशा और हताशा थी ,, और उनकी रूचि कॉलोनी स्थापित करने में भी नहीं थी / दूसरे फ्रांस के पास महान रोमन संस्कृति के उत्तराधिकारी होने कि धरोहर थी , इसलिए उसका मनोबल काफी ऊँचा था / तीसरे यूरोपीय और खास तौर से फ़्रांसिसी , जर्मनियों को बर्बर राष्ट्र कहते थे , जिन्होंने रोमन सभ्यता को नष्ट किया /
            ऐसे उस निराशा के माहौल में जर्मन राष्ट्रवादियों को कुछ ऐसा चाहिए था , जो उनके राष्ट्र्रीय अस्तित्व और स्वाभिमान को पुनर्श्थापित कर सके / मैक्समूलर और उसके बाद जितने भी जर्मन राष्ट्रवादी थे , जब उनको ये मौका मिला कि आर्य एक नोबल रेस थी ,,,जो कहीं बाहर से आयी थी ,,तो उन्होंने हांथोहान्थ इस मौके को लपक लिया / जिससे जर्मनी ने एक नवीन राष्ट्रवाद का उदय हुवा , और उन्होंने Indogerman भाषा संस्कृत , और संस्कृत बोलने वाले लोगों (आर्यों) पर अपनी दावेदारी ठोंक दी / ये काम उन्होंने कैसे किया ? ये बाद में /
          • Praphull Jha
          • Praphull Jha आप जितना लिखते है उतना मुझे ज्ञात होता है की मैं कितना अज्ञानी हूँ।See Translation
          • Arun Kumar
          • Arun Kumar Tribhuwan G, बाईबिल के अनुसार सूर्य चलायमान है तो हमारे mythology मे भी सूर्य को रथासीन बताया गया है।See Translation
          • Tribhuwan Singh
          • Tribhuwan Singh उल्टा समझा आपने बाइबिल कहती है की पृथ्वी स्थिर है।
            और सूर्य गतिमान है ।
          • Tribhuwan Singh
          • Tribhuwan Singh Arun ji अरे आपने तो फंसा दिया। कोशिश करता हूँ निकलने की।
          • Arun Kumar
          • Arun Kumar दोनों के अनुसार सूर्य गतिमान है। यही न।See Translation
          • Tribhuwan Singh
          • Tribhuwan Singh नहीं वैदिक साहित्य में पूरे सोलर सिस्टम का वर्णन है । लिंक पेश है।
          • Tribhuwan Singh
          • Tribhuwan Singh Vedic Science -- The Solar System and Where Modern ...
            Video for solar system according to vedas► 10:18► 10:18
            www.youtube.com/watch?v=IJQbXTeuauI
          • Arun Kumar
          • Arun Kumar मै मिथ का कह रहा था । Vedic Science तो scientific है ही।See Translation
          • Tribhuwan Singh
          • Tribhuwan Singh @arun kumar ji , पहले इसी बात पे चर्चा करें की मिथ का मिथक क्या है ?? मिथ का इतिहास क्या है ??
          • Arun Kumar
          • Arun Kumar सारे जुतम जुती तो मिथ और मिथक पर हो रहा हैSee Translation
          • Tribhuwan Singh
          • Tribhuwan Singh तो चलिए पहले यही क्लियर किया जाय की मिथ क्या है ?? और माइथोलॉजी क्या है।
          • Tribhuwan Singh
          • Tribhuwan Singh विलियम जोंस ने जब सन्स्कृत और यूरोपीय भाषाओँ का सम्बन्ध बाइबिल में वर्णित बेबल के टावर से के अनुसार पूरी दुनिया के लोगों को को Noah के तीनों पुत्रो jepheth Sam aur ham के वंशजों के हिसाब से विभाजित किया तो भारत को Ham के वंशजों में वर्गीकृत किया। इसी तरह अफ्रीका के काले लोगों को भी Ham के वंशजों में वर्गीकृत किया।
             
            • Tribhuwan Singh बाइबिल के अनुसार प्रलय (बाढ़) के अनुसार पूरी दुनिया noah के तीनों पुत्रो के वंशजों से बसनी है ।इसलिए पूरी दुनिया के निवासियों को ऊपर वर्णित कुनबों में बांटा गया। आप गूगल करिए samites hamites तो ज्यदा स्पस्ट हो जाएगा। Noah ने अपने पुत्र Ham के वंशजों यानि Hamites को अपने बाकी दो पुत्रो के वंशजों की perpetual slavery में रहने का श्राप दिया था। अब जब यूरोपियन ने कॉलोनियां बनाई पूरी दुनिया में तो उनको अनजानी रीति रिवाज संस्कृति और साहिय का पता चला। यूरोप में ये गहरे बहस का विषय था कि इन लोगों को बाइबिल के अनुसार किस कुनबे में ड़ाला जाय। काले रंग के लोंगो को hamites में गणना किया गया। मूल निवासियों के उन रीति रिवाज और साहिय जो बाइबिल के फ्रेमवर्क में फिट नहीं बैठता था , उसको मिथ या मिथक का नाम दिया गया।
            • Tribhuwan Singh
            • Tribhuwan Singh चूंकि बाइबिल में hamites श्रापित थे तो उन काले मूलनिवासियों को बर्बर असभ्य अनैतिक दुष्ट और स्लेवरी को deserve करने लायक, जैसी उपाधियों से लादा गया।
              यही से अवर्ण (discolored) की शुरुवात हुई।
              white लोग सवर्ण और काले अवर्ण या असवर्ण ।

              इसीलिये christianon ने वर्ण को मतलब चमड़ी के रंग से जोड़ा ।
              यहाँ तक की प्रोटोस्टेंट आन्दोलन के जनक मार्टिन लूथेर ने कहा कि hamites के अन्दर शैतानी गुण और घृणा भरी होती है।
            • Tribhuwan Singh
            • Tribhuwan Singh रंगभेद इसाइयत में शुरुवात से ही है।चर्च के शुरुवाती फाउंडर अलेक्सांद्रिया के preist Origen(185-254CE) ने egyptians की गुलामी का कारण ही उनका discolor होना है क्योंकि वे दुस्ट Ham के वंशज हैं ।
            • Tribhuwan Singh
            • Tribhuwan Singh @Arun ji मिथ की सच्चाई समझ में आयी।
            • Tribhuwan Singh
            • Tribhuwan Singh यानि सवर्ण और असवर्ण भी मॉडर्न फलसफा है और भारत को इसाई फलसफा की गिफ्ट है।
            • Tribhuwan Singh
            • Tribhuwan Singh इसीलिए महाभारत और रामायण एक मिथक हैं ।
            • Tribhuwan Singh
            • Tribhuwan Singh रंग के आधार पर अफ्रीका का इतिहास सब जानते हैं। लेकिन शायद ये न पता हो की इसके मूल में बाइबिल के निहित मूलमंत्र हैं।
            • Arun Kumar
            • Arun Kumar सभी मानव सभ्यता और संस्कृति ईसाईयत के प्रभाव से वंचित नहीं रह पाया।इसका कारण क्या है उनका धर्म प्रचार नीति , हमारे धार्मिक विसंगतिया या ब्राह्मणवाद जो आजके दलित चिंतको का चिंतन विषय है।See Translation
               
              • Tribhuwan Singh वापस आते हैं आर्यन (जिन लोगों की भाषा संस्कृत है ) invasion मिथ पर / जब विलियम जॉन ने संस्कृत भाषा को यूरोपियन भाषाओँ की जननी स्थापित कर लिया तो उनके, बाद के यूरोपीय विद्वानो ने ये सिद्ध करना शुरू किया भारत/इंडो ईरानियन ही समस्या मानवजगत के जनक हैं / जिनको आर्यन रेस के नाम से जाना जाता है /
                इनके दो समूह पूर्व से पश्चिम की तरफ माइग्रेट किये तो जो लोग जर्मनी पहुंचे ,उन्होंने संस्कृत संस्कृति , जो कि एक डायनामिक उत्तम और प्रकृति के रहस्यों को ज्यादा बढ़िया तरीके से एक्सप्लेन करती है , उसकी शुद्धता जर्मन निवसयों ने शुरुवात से अक्षुण रखा , वो विशुद्ध जर्मन आर्यन रेस है /
                आर्यों (संस्कृत बोलने वाले ) का दूसरा मानव समूह जो पश्चिमी विश्व कि तरफ ,उसने ग्रीक और रोमन कल्चर के जन्मदाता हैं , लेकिन वे संस्कृत कि शुद्धता बरक़रार न रख पाये, वे आर्य होते हुए भी जर्मन आर्यों से इन्फीरियर रेस हैं , इसलिए फ्रांस जो ग्रीक और रोमन कल्चर का वाहक है ,और इसीलिये उसको पुनर्जागरण की जरूरत है /
                लेकिन एक बात जो दोनों में कॉमन है वो है --monogod के उपासक हैं यानि क्रिस्चियन हैं , क्योंकि आर्य मूलतः एकब्रम्ह के उपासक थे /
                एक तीसरा आर्यों का मानव समूह जो पूर्व यानि भारत और फिर दक्षिणी भारत कि और माइग्रेट किया, वो देगेनेरते हो गया क्योंकि वे मूर्तिपूजक और बहुदेव वाद के उपासक हो गए /
                अब आगे इसी में ये कहानी गढ़ी जायेगी कि जो भारतीय आर्य थे, उन्होंने भारत के मूल निवासी "द्रविड़ों" को दक्षिण कि और खदेड़ दिया / लेकिन उसके बारे में बाद में /
              • Tribhuwan Singh
              • Tribhuwan Singh Arun kumar ji , दुनियां के वे धर्म जो धर्म परिवर्तन में यकीन रखते हैं, उनके राजनीती के साथ साथ धर्म परिवर्तन का एजेंडा साथ साथ जुड़ा होता है / भारतीय इतिहास के सन्दर्भ में हिन्दुओं को पृथ्वीराज के साम्राज्य के पतन के बाद, शिवाजी पहले वे व्यक्ति थे जिनको...See More
              • Tribhuwan Singh
              • Tribhuwan Singh अब देखिये आगे जर्मनी आर्यन मिथ को कैसे देश में ,,देश की अस्मिता को , देश के स्वाभिमान को जागृत करने के लिए करता है , जिससे वो barbaric जर्मनस कि उपाधि से और अंधकूप से देश को बाहर निकालता है , लेकिन उसके पहले अंग्रेजों को क्या लाभ हुवा आर्यन मिथ को जन्म देकर ?
              • Tribhuwan Singh
              • Tribhuwan Singh अगर इस पूरी कहानी को timeline के अनुसार पढ़ा जाय तो एक मजेदार उपन्यास फिक्शन कि तरह लगेगा /
              • Arun Kumar
              • Arun Kumar मजेदार ही नहीं ज्ञानबर्धकSee Translation
              • Tribhuwan Singh
              • Praphull Jha
              • Praphull Jha Now enjoying every line of it..
              • Arun Kumar
              • Praphull Jha
              • Praphull Jha आप को लिख के जितना गर्व अनुभव नहीं हुआ होगा ,उतना मुझे पढ़ के हुआSee Translation 
                 
                • Tribhuwan Singh अंग्रेजों को इस आर्यन मिथ से कई राजनैतिक फायदे हुए /आर्यों के भारत के मूल निवासी न होकर बाहर से आये इंडोईरानियन/ इंडियूरोपीन मूल के निवासी होने के एक मिथ, को स्थापित करने के उपरांत उसको एक राजनैतिक दिशा दी कि :
                  (१) चूंकि आर्य मूलतः भारत के निवासी नहीं
                  थे, और उन्होंने बाहर से आकर अपनी सत्ता स्थापित किया, तो अंग्रेजों का भारत में सत्ता स्थापित करना कोई नयी बात नहीं है , ये उसी की पुनरावृत्ति है , और ये उनका राजनैतिक अधिकार है /
                  (२) भारत में अंग्रेजों के आगमन को ब्रिटिश आर्यों का भारतीय आर्यों से मिलना , आर्यों की घरवापसी समझा जाना चाहिए / जैसे कुम्भ में बिछड़े दो भाइयों का पुनर्मिलन /
                • Tribhuwan Singh
                • Tribhuwan Singh अब बात किया जाय कि विलियम जोन्स और मैक्समूलर के नेतृत्व में कपोलकल्पित "आर्यन मिथ " का परिणाम क्या हुवा जर्मनी में , जिसकी कीमत ६० लाख यहूदियों और ४० लाख जिप्सियों और न जाने कितने सिपाहियों को अपने प्राण देकर चुकानी पड़ी / उस विभीषिका का असर से जापान की कई पीढ़ियों को रेडिएशन हज़्ज़ार्ड से चुकाना पड़ा /
                  जब ये थ्योरी यूरोप पहुंची कि महान संस्कृत बोलने वाले आर्यों की उत्पत्ति यूरोप से हुई है , तो जर्मन विद्वानों को देश में व्याप्त निराशा और बर्बर जर्मन कहलाये जाने के पीड़ा से उबारने के लिए , और एक नेशनल प्राइड और आइडेंटिटी पैदा करने के लिए एक हथियार मिल गया / उन्होंने लिख लिख कर ये सिद्ध किया कि वास्तव में वो ही आर्य हैं / चेम्बर्लेन (१८५५-१९२७) ने एक पुस्तक लिखी-" the foundations of nineteenth century " . वो उस समय कि बेस्ट सेलर पुस्तक थी ,जिसके २८ एडिशन निकले / उसने लिखा - कि आर्य जहाँ भी गए उन्होंने विजय का परचम लहराया / भारत में भी वाइट कलर "वर्ण" के विजयी आर्य रेस ने काले दश्यु लोगो को पराजित किया " / वो नाज़ी लीडरशिप का अभिन्न अंग बन गया /और उसको मरणोपरांत "Third Reich के seer यानि संत कि उपधि मिली /
                  हिटलर ने आर्यों के श्रेष्ठता को अपना मूलमंत्र बनाया और हिन्दुओं कि पवित्र स्वस्तिक के निशान को अपने सेना के जवानों कि वर्दियों पे एक logo कि तरह चिपकाया /
                  दूसरे विश्वयद्ध में क्या हुवा ये बताने कि जरूरत नहीं है ,,लेकिन उस युद्ध के पश्चात यूरोप की अकादमिक पुस्तकों से ही नहीं, आम जनमानस के मनोमस्तिष्क से "आर्य रेस " की यादाश्त को साफ़ करने का सक्रिय प्रयास किया गया /
                  इस तरह यूरोप से तो महान आर्य रेस विलुप्त हो गयी , लेकिन भारत के वामपंथी और दलित चिंतक उस महान आर्य रेस के चूल्हे पर अपने स्वार्थ की रोटी सेंके जा रहे हैं .धन्य हैं ये चिंतक और विद्वान ,,उनको तो सादर दंडवत के पात्र हैं /
                • Tribhuwan Singh
                • Tribhuwan Singh अब इस बात की चर्चा की जाय की वास्तव में "आर्य" शब्द का मतलब क्या है ?? चूंकि "आर्य शब्द को एक नश्ल" बनाकर मैक्समूलर ने स्थापित किया था ,,और उसके बाद के फिलोलॉजिस्ट इंडोलॉजिस्ट और ओरिएंटलिस्टों ने , जिनका मतलब होता है वे विद्वान जो संस्कृत के ज्ञाता हैं , ने उस आर्यन मिथ को आगे बढ़ाया, क्या वे वाकई संस्कृत के ज्ञाता थे , की कॉपी एंड पेस्ट मास्टर थे ?? अब इस पर चर्चा करना चाहेंगे /
                • R Kasturi Naidu
                • R Kasturi Naidu The vote percentage of Brahmans in Maharashtra Election 2014 is only 2%.
                • Tribhuwan Singh
                • Tribhuwan Singh विलियम जोन्स और मैक्समूलर तक सारे संस्कृतविद और उनकी विचारधारा को आगे ले जाने वाले यूरोपियन क्रिस्चियन विद्वानों ने, चूंकि "आर्य रेस / नश्ल " उन लोगों को कहा , जिनके पूर्वजों और वंशजों की लिखित और बोलने वाली भाषा संस्कृत थी, और प्रमाणित भी किया, लिख -लिख के / तो अब जो छप गया वो तो सत्य ही होगा , जैसे हम दिन प्रतिदिन के जीवन में मानते हैं, कि यार ये तो अखबार में छपा है, इसलिए तथ्यपरक और सच ही होगा / जबकि पत्रकारिता से जुड़े लोग जानते हैं कि जो छपता है ,,वो कई बार सच नहींहोता , और अक्सर सच्चाई से कोसों दूर होता है /
                  और चूंकि इसी लिखे पढ़े सत्य का पर्दाफाश करने के लिए, हमें संस्कृत भाषा में , आर्य शब्द को किस सन्दर्भ में प्रयोग किया गया है, कुछ खोजना पड़ेगा / उसी तरह जैसे हमें बचपन में साइंस को पढने के लिए , प्रयोग सिखाया जाता था, कि आओ इसका पता लगाएं /
                   
                  • Tribhuwan Singh "श्रीमदमरसिंहप्रणीतः अमरकोश", मेरे सूचना के आधार पर दुनिया का पहला ,परन्तु संस्कृत भाषा का सबसे प्रामाणिक और महत्वपूर्ण डिक्शनरी (शब्दकोष ) है / अब देखिये इसमें खोजते हैं कि आर्य शब्द का क्या मतलब है ?? और किस सन्दर्भ इस शब्द को प्रयोग किया गया है ?
                    अमरकोश के द्वितीयं कांडः , ब्रम्हवर्ग: ७ /३ के अनुसार ---
                    ( खट सज्जनस्य )
                    महाकुल-कुलीन-आर्य-सभ्य-सज्जन साधवः
                    सज्जन व्यक्तियों को ६ नामों से सम्बोधित करते है --
                    (१) महाकुल (२) कुलीन (३) आर्य (४) सभ्य (५) सज्जन (६) साधु
                    अरे ये क्या है ?? खोज पहाड़ निकली चुहिया ??
                    अरे ये तो साधु , सज्जन और सभ्य लोगों के सम्बोधन कि पर्यायवाची है / क्या सभ्य, साजन, साधु,.कुलीन और किसी अच्छे परिवार (महाकुल और कुलीन ) में जन्म लेना किसी ख़ास नश्ल या रेस को परिभाषित करता है / ये तो व्यक्तियों के चरित्र कि व्यक्तिगत धरोहर भर है / क्या गंगापुत्र भीष्म का प्रपौत्र दुर्योधन, यदि सज्जन न होकर दुर्जन निकल गया तो ,,भीष्म तो आर्य हो गए , और दुर्योधन अनार्य ??
                  • Tribhuwan Singh
                  • Tribhuwan Singh आज भी भारतीय परम्परा में चाहे जिस वर्ण या जाति के लोग हों अपने पितामह को आजा ,,(बाबा) या अइया के नाम से ही सम्बोधित करते हैं, जो उसी संस्कृत भाषा से उद्धृत शब्द हैं / क्या आप के ग्रांडफादर , एक अलग नश्ल के व्यक्ति हो जाते हैं ,,जब आप उनको आर्य आजा या अइया कहकर सम्मान देते हैं ?
                    दलित चिंतकों से निवेदन है कि कृपया अपने पारिवारिक परंपरा को विस्मृत न करें , क्योंकि यही परंपरा उनके घरों की भी ऐ /है , और सम्पूर्ण भारत कि यही परम्परा आज तक है /
         
         

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